हरिद्वार में रामकृष्ण मिशन अस्पताल प्रबंधन ने छोटे नोट नहीं देने पर एक महिला के शव को चार घंटे तक रोके रखा। अस्पताल में हंगामा और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद भी अस्पताल प्रबंधन शव देने को तैयार नहीं हुआ। परिजनों ने किसी तरह से छोटे नोटों की व्यवस्था करके महिला का शव छुड़वाया।
नोटबंदी की मारः छोटे नोट नहीं थे तो अस्पताल ने नहीं दी डेडबॉडी
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कनखल स्थित रामकृष्ण मिशन अस्पताल में बुधवार की दोपहर करीब एक बजे झुग्गी बस्ती, चंडीघाट निवासी लक्ष्मी देवी पत्नी
तेजबीर को तबियत बिगड़ने पर भर्ती किया था। इलाज के दौरान शाम चार बजे लक्ष्मी की मौत हो गई। चिकित्सकों ने परिजनों को दस हजार रुपये बकाया का बिल थमा दिया।
परिजनों ने भुगतान करने में असमर्थता जताई तो कुछ लोग मामले को लेकर अस्पताल के संचालक ट्रस्ट के प्रतिनिधियों से मिले। उन्होंने बिल में पांच हजार की छूट दे दी।
जैसे-तैसे परिजनों ने रुपयों का इंतजाम किया, लेकिन पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट की ही व्यवस्था हो सकी। तेजबीर जब रुपये लेकर अस्पताल पहुंचा तो वहां काउंटर पर इन रुपयों को लेने से कर्मचारी ने इंकार कर दिया। अस्पताल कर्मियों का कहना था कि छोटे नोट ही लिए जाएंगे।
इस पर परेशान परिजनों ने कुछ लोगों से संपर्क साधा। कई लोग उनके समर्थन में आ गए। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव जेपी पांडे और व्यापारी अमित कुमार आदि ने ट्रस्ट के सदस्यों से संपर्क किया। इस पर भी बात नहीं बनी तो कनखल थानाध्यक्ष से शिकायत की गई।