ग्लोबल वार्मिंग से जूझ रहा हिमालय हिम युग की तरफ बढ़ रहा है जिससे ग्लेशियरों का आकार फिर बढ़ेगा। इस क्षेत्र में कुछ स्थानों पर ग्लेशियर बढ़ने के संकेत मिले हैं। तापमान के उतार-चढ़ाव से गल कर बह गया गंगोत्री ग्लेशियर का गोमुख एक बार फिर वजूद में आएगा।
हिम युग की ओर बढ़ रहा हिमालय, वैज्ञानिकों को मिले ये संकेत
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इसके साथ ही एक और चौंकाने वाली बात उजागर हुई कि हिमालयी क्षेत्र में औद्योगिक, मानव गतिविधियां कार्बन डाई आक्साइड बढ़ाने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार नहीं है। करोड़ों साल पहले हिमालयी क्षेत्र में आज की तुलना में 17 गुना कार्बन डाई आक्साइड अधिक रही है।
गंगोत्री ग्लेशियर के सिकुड़ने और गौमुख बहने के बाद वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के विज्ञानियों ने पृथ्वी के इतिहास से संबंधित आंकड़े खंगाले तो चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। हिमालयी क्षेत्र में कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा लगातार घट रही है।
50 करोड़ साल पहले हिमालय में कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा 7500 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) थी, 40 करोड़ साल पहले 3000 पीपीएम हुई और अब घटकर 420 पीपीएम पर आ गई है। विज्ञानियों का मानना है कि औद्योगिक और मानव गतिविधियां हिमालय में कार्बन डाई आक्साइड फैलाने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार नहीं है।
विज्ञानियों का कहना है कि सूरज का मूड बदलने और इसकी चमक घटने-बढ़ने से कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा बढ़ती है।
इसके अलावा उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर हिमालय में हिम युग की आहट के संकेत मिलने लगे हैं। ग्लेशियल ऐज पूरी तरह कब प्रभावी होगी, विज्ञानी इसका आकलन कर रहे हैं।