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बर्फबारी न होने से 'घट' रहा हिमालय

Wed, 04 Jan 2017 11:53 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 04 Jan 2017 11:53 AM IST
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himalaya range decreases due to Less snow
glaciers - फोटो : Getty Images

ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम का मिजाज बदलने से हिम रेखा पीछे खिसकती जा रही है, जिससे हिमालयी क्षेत्र में बर्फ क्षेत्र घट रहा है।



हिम रेखा के पीछे खिसकने से बर्फ से खाली हुई जमीन पर वनस्पतियां उग रही हैं। पेड़ और झाड़ियां (ट्री लाइन) जितने ऊपर जाएगी, ग्लेशियरों की सेहत के लिए उतना खतरा बढ़ेगा।

दिसंबर और जनवरी में अभी तक बर्फबारी कम होने से विज्ञानियों की उलझन बढ़ गई है। देर हुई तो बढ़े तापमान की वजह से बर्फबारी बारिश में तब्दील हो जाएगी।

हिम रेखा पीछे खिसकने से ग्लेशियर सिकुड़ रहा है

himalaya range decreases due to Less snow
glacier broken behind gaukumkh

जलवायु परिवर्तन का यह प्रभाव मध्य हिमालयी क्षेत्र के बर्फ से ढके रहने वाले इलाके पर पड़ रहा है। गंगोत्री का भोजवासा क्षेत्र जो कभी बर्फ से ढंका लकदक रहता था, वहां वनस्पतियां उग आई हैं। गंगोत्री ग्लेशियर पहले जहां तक फैला हुआ था, वहां हिम रेखा पीछे खिसकने से ग्लेशियर सिकुड़ रहा है।

विज्ञानियों का कहना है कि वनस्पतियां उग आने से यहां बर्फ गिरी भी तो इकट्ठी नहीं हो पाती है। वनस्पतियों की वजह से माहौल बदल जाता है। इसी तरह पूरे हिमालयी क्षेत्र में विज्ञानियों ने ट्री लाइन ऊपर जाने और स्नो लाइन पीछे खिसकने की पुष्टि की है।

विज्ञानियों का कहना है कि ऊपर (हाई एल्टीट्यूड) पर बर्फ चाहे जितनी गिरे, जब तक यह नीचे की ओर नहीं आएगी ग्लेशियरों की सेहत में सुधार नहीं होगा।

हिम रेखा के और सिकुड़ने का अंदेशा पैदा

himalaya range decreases due to Less snow
himalaya

दिसंबर-जनवरी में अभी तक गंगोत्री क्षेत्र में सिर्फ 80 सेमी बर्फबारी हुई है। इस क्षेत्र में गढ़वाल हिमालय का सबसे बड़ा ग्लेशियर है। वर्ष 2002 में इस क्षेत्र में इन दिनों 20 फुट बर्फ गिरी थी।

वर्ष 2016 के अलनीनो वर्ष होने पर यहां बर्फबारी न के बराबर हुई। लेकिन वर्ष 2017 में अभी तक यहां बहुत सुधार नहीं दिख रहा है। इस वजह से हिम रेखा के और सिकुड़ने का अंदेशा पैदा हो गया है। यही स्थिति कमोबेश पूरे मध्य हिमालयी क्षेत्र में नजर आ रही है।

स्नो लाइन के ऊपर जाने से बर्फ का क्षेत्र कम होता जाएगा। यहां वनस्पतियां उग आएंगी। इससे बर्फ इकट्ठी नहीं हो पाएगी। इससे ग्लेशियरों की सेहत और खराब हो सकती है। दिसंबर-जनवरी में अभी तक ढंग की बर्फबारी न होना अच्छे संकेत नहीं हैं।
- डा. समीर तिवारी, गंगोत्री प्रभारी एवं विज्ञानी, हिमनद अध्ययन केंद्र, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान

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