हरिद्वार में ज्योतिष और द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की मंगल प्रवेश शोभायात्रा में कुंभनगरी की सड़कों पर अवधूती वैभव नजर आया। मंगल प्रवेश शोभायात्रा में पहली बार शामिल हुई मां गंगा और यमुना की पवित्र छड़ी श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। विशेष वाहन में बैठे शंकराचार्य के दर्शन के लिए सड़कों पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। संतों और श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शंकराचार्य को नमन किया तो उन्होंने भी हाथ उठाकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।
कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में बृहस्पतिवार सुबह गंगोत्री और यमुनोत्री धाम से लाई गई पवित्र छड़ियों का पूजन किया गया। इसके बाद ज्योतिष और द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती विशेष वाहन से पुराना रानीपुर मोड़ स्थित भगवान परशुराम चौक पहुंचे।
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यहां से ढोल नगाड़ों के साथ भव्य मंगल प्रवेश शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। शोभायात्रा में उत्तराखंड के जौनसार बावर के लोक कलाकार रणसिंघा और ढोल बजाते हुए चल रहे थे। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती अपने विशेष वाहन में बैठे थे। धर्मध्वजा के पीछे चल रहे पंचशंभू अग्नि अखाड़े के नागा संन्यासियों के करतबों को देख श्रद्धालु हैरान हो गए।
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शंकराचार्य की शोभायात्रा
- फोटो : अमर उजाला
शोभायात्रा के दौरान श्रीराम मंदिर, मां भारती, सैनिकों, भगवान परशुराम का फरसा और तलवार थामे कलाकारों की झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। श्री परशुराम अखाड़े की सुंदर झांकियों को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं की भीड़ लग गई। शहर में विभिन्न स्थानों पर साधु संतों पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
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शंकराचार्य की शोभायात्रा
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मंगल प्रवेश शोभायात्रा परशुराम चौक से देवपुरा चौक, तुलसी चौक, शिवमूर्ति तिराहा, नगर कोतवाली, अपर रोड, हरकी पौड़ी, भीमगोड़ा होते हुए चंडी टापू नीलधारा स्थित शंकराचार्य शिविर में पहुंचकर संपन्न हुई। शोभायात्रा में शंकराचार्य के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, मठ-मंदिर सलाहकार समिति के अध्यक्ष सुबुद्धानंद ब्रह्मचारी, ब्रह्मचारी रामानंद, स्वामी साधनानंद ब्रह्मचारी, स्वामी ऋषिश्वरानंद, स्वामी कल्याणदेव, ब्रह्मचारी श्रवणानंद, स्वामी नारायणानंद, सतपाल ब्रह्मचारी, श्री परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष अधीर कौशिक शामिल रहे।
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शंकराचार्य की शोभायात्रा
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का विशेष वाहन जब चलना शुरू हुआ तो उनके शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उनके विशेष वाहन के आगे की तरफ अपना मुंह कर लिया। इस दौरान वे नंगे पांव थे। जब विशेष वाहन चलना शुरू हुआ स्वामी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उल्टे पांव रथ के आगे चलना शुरू कर दिया।
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वे शंकराचार्य के शिविर तक उल्टे पैर चलते हुए ही पहुंचे। शिष्य की अनूठी गुरु भक्ति को देख श्रद्धालु हैरान थे। परंपरा के अनुसार शोभायात्रा में जगद्गुरु शंकराचार्य के शिष्य उनकी तरफ पीठ कर नहीं चलते हैं।