गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) से जहां पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है, वहीं एक जगह ऐसी भी है जो इस टैक्स के लागू होने से बेहद खुश है। दरअसल जीएसटी के बाद यहां 148 साल पुरानी अंग्रेजों के जमाने की एक परंपरा खत्म हो गई।
GST से खत्म हुई इस जगह की 148 साल पुरानी अंग्रेजों के जमाने की परंपरा
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यह जगह है उत्तराखंड का चकराता छावनी क्षेत्र। यहां रहने वाले लोगों को 148 वर्ष पुराने अंग्रेजों के जमाने के कर से मुक्ति मिल गई। अभी तक पूरे देश में केवल चकराता ही ऐसा कैंट एरिया था, जहां आजादी के बाद भी चुंगी वसूली जाती है। लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद एक जुलाई से छावनी क्षेत्र में रहने वालों को अब चुंगी कर नहीं अदा करना पड़ेगा।
वर्ष 1869 में चकराता कैंट बसाया गया था। तब अंग्रेजी हुकूमत छावनी क्षेत्र में आने वाले सामान पर कर वसूलती थी। 1947 में आजादी के बाद देश के 60 कैंट क्षेत्रों में चुंगी प्रथा को समाप्त कर दिया गया, लेकिन एक मात्र चकराता ही ऐसा कैंट बचा, जहां नमक से लेकर नए घरेलू सामान तक की कीमत पर 3-5 प्रतिशत तक चुंगी वसूली जाती थी।
लिहाजा क्षेत्र में सामान अन्य इलाकों की अपेक्षा महंगा बिकता था। यही नहीं छावनी क्षेत्र से माल लेकर गुजरने वाले हर वाहन से बहती के रूप में कर वसूला जाता था। जो एक ट्रक पर 200-1000 रुपये तक होता था। अधिशासी अधिकारी जोंस विकास ने बताया कि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू होने के बाद चुंगी वसूली की व्यवस्था भी समाप्त हो गई है।
चुंगी व्यवस्था को समाप्त करने के लिए क्षेत्र के व्यापारियों ने बड़े आंदोलन किए। मामला कोर्ट भी पहुंचा, लेकिन व्यापारियों की कमजोर पैरवी से केस खारिज हो गया और टैक्स पूर्व की तरह वसूला जाता रहा। अब जीएसटी के बाद व्यापारियों को इस कर से राहत मिल गई।