यह समूचा ब्रह्मांड एक महा विस्फोट से उपजा है। किस योग में वह विस्फोट हुआ, समय पर मनीषी यह जानने का प्रयत्न आज तक कर रहे हैं।
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कौन है ब्रह्मांड का सबसे बड़ा योगी, पता नहीं होगा ये राज, जानिए यहां
कौशल सिखौला / अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Thu, 22 Jun 2017 09:22 AM IST
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अनादि त्रिदेवों में से महादेव शिव पहले महायोगी थे। पतंजलि ने योग को सूत्रबद्ध किया और पतंजलि की आचार्य पीठ से योग का विस्तारण न केवल धरती अपितु ब्रह्मांड पर किया गया।
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अध्यात्म और वेदों में योग का विस्तार से वर्णन मिलता है। वास्तव में जीवात्मा और परमात्मा का मिलन ही योग है। योग अहंकार की पुष्टि नहीं करता अपितु अहंकार का विनाश करता है। जिस पल चित की वृत्तियां समाप्त हो जाएं, तब योग का एक कण प्रारंभ होता है।
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Yoga
आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार योग एक नहीं अपितु अष्टांग का मिलन है। इस मिलन का निष्कर्ष योग है। इस मिलन में यम, नियम, आसन, प्रणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि शामिल होते हैं। यम और नियम को छोड़ दें तो प्रणायाम निरर्थक है। अष्टांग योग बनता ही तब है जब आठों तत्व मिल जाएं।
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योग
- फोटो : SELF
जाने माने सिद्ध योगी प्राण को जीवन शक्ति और अनुशासन को आयाम बताकर प्रणायाम की सृजना करते हैं। भगवान शिव ने पहली बार नाद स्वर से योग का उद्घोष किया था। बाद में वेदों के ऋषियों ने इस महा प्रस्फुटन को व्याख्या और विस्तार दिया। भारतीय धर्मग्रंथों में योग एक अमर साधना के समान है। भगवान कृष्ण स्वयं महायोगी अवतार में अवतरित हुए थे। विष्णु का यह अवतरण संसार को योग की वह अनादि विधा बताने के लिए था, जो ब्रह्मा ने रची थी।