जून 2013 में केदारनाथ धाम में तबाही होने के बाद अब गंगोत्री धाम पर तबाही का खतरा मंडरा रहा है। भागीरथी नदी की अपस्ट्रीम में वर्ष 2013 की आपदा में जमा रेत, बजरी, पथर का मलबा हटाकर गंगोत्री को सुरक्षित करने की कोशिश न करने के कारण अब इस तीर्थ धाम के तटवर्ती हिस्सों पर तबाही का संकट मंडराने लगा है।
2013 की केदारनाथ आपदा के बाद अब गंगोत्री धाम पर तबाही का खतरा
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मलबे से रीवर बैड ऊंचा होने के कारण नदी का प्रवाह शिफ्ट होने से शिवानंद कुटीर तथा गंगोत्री मंदिर के पुजारी देवेंद्र सेमवाल के मकान और पायलट बाबा आश्रम के कुछ हिस्से भागीरथी में बह गए। इसके अलावा धाम में नदी के तटवर्ती हिस्सों पर खतरा मंडराने लगा है। कारण चाहे ग्लोबल वार्मिंग हो या फिर कुछ और, लेकिन हिमालयी क्षेत्र में मौसम का बदलता ट्रेंड बड़े खतरे का संकेत दे रहा है।
कुछ साल पहले तक भोजवासा, गोमुख क्षेत्र में बारिश के बजाय बर्फ की हल्की फुहारें पड़ती थीं। अब स्थिति यह है कि यहां झमाझम बारिश हो रही है। बारिश का पानी गंगोत्री ग्लेशियर की सेहत के लिए भारी नुकसानदायक होने के साथ ही गंगोत्री से गोमुख के बीच वाले गाड गदेरों का उफान भारी मलबा भागीरथी नदी में ला रहा है। यही कारण है कि अब गंगोत्री धाम में भारी मलबा जमा होने से रीवर बैड ऊंचा हो गया है।
जुलाई तीसरे हफ्ते में अपर भागीरथी क्षेत्र में अतिवृष्टि और ग्लेशियर चटकने के कारण भागीरथी में आए उफान ने गंगोत्री धाम के तटवर्ती हिस्सों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया गया। अब हालत ये है कि रीवर बैड ऊंचा होने से भागीरथी पल-पल अपना प्रवाह पथ बदल रही है। भागीरथी का पानी स्नान घाटों को लांघ कर मंदिर की ओर भगीरथ शिला, पुरोहित निवास, चेंजिग रूम तक पहुंचने लगा है।
शिवानंद कुटीर ध्वस्त हो गया और दीपिका सदन के नीचे के पिलर दो फाड़ हो गए हैं। नदी के बाएं किनारे गंगा निकेतन सहित एक दर्जन से ज्यादा भवनों पर भी नदी तल उठने से खतरा मंडराने लगा है। कई साधु संतों की कुटिया और सिंचाई विभाग का गेस्ट हाउस भी खतरे की जद में है।