गणेश चतुर्थी इस बार 2 सितंबर को मनाई जाएगी। वैसे तो हर साल तीज व्रत के दूसरे दिन भगवान श्रीगणेश की स्थापना की जाती है, लेकिन इस बार ग्रहों, नक्षत्रों व मुहूर्त का योग ऐसा बना है कि तीज के दिन ही भगवान श्रीगणेश की स्थापना करना शुभ होगा। इससे सभी कष्ट दूर होंगे और तीज व्रत से स्त्रियों को सौभाग्य मिलेगा।
गणेश चतुर्थी 2019: सालों बाद बन रहे तीन विशेष संयोग, ऐसा करने से दूर होंगे कष्ट और मिलेगा सौभाग्य
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इसे कष्ट निवारण योग के रूप में भी देखा जा सकता है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष में भगवान शिव परिवार की उपासना के तीन विशेष संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित सतेंद्र शर्मा व पंडित संदीप भारद्वाज शात्री के अनुसार वर्षों बाद हरितालिका तीज व्रत पर दो सितंबर को ही सिद्धि विनायक गणेश चतुर्थी है।
हरितालिका तीज में मातृशक्ति भगवान शिव-पार्वती की उपासना कर अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। इसी व्रत अनुष्ठान के दौरान सर्व कामनाओं की पूर्ति करने वाले प्रथम पूज्य गणेश की स्थापना होगी। सोमवार को पड़ रहा तीज व्रत हस्त नक्षत्र युक्त है। जो शुभ माना जाता है। अनंत चतुर्दशी 12 सितंबर को आस्था के साथ प्रतिमा विसर्जन होगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सुशांत राज के अनुसार, अमृत चौघड़िया में सुबह 6:10 से 7:44 तक और अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:01 से 12:55 तक मूर्ति स्थापना करना शुभ होगा। बाईं तरफ की सूंड की प्रतिमा लेना ही शास्त्र सम्मत माना गया है। दाईं तरफ की सूंड की प्रतिमा में नियम-कायदों का पालन करना होता है। प्रतिमा हमेशी बैठी हुई मुद्रा में ही लेनी चाहिए। क्योंकि खड़े हुए गणेश को चलायमान माना जाता है।
वहीं, हरितालिका तीज 1 सितंबर यानी कि रविवार को सुबह 8 बजकर 28 मिनट के बाद लगेगी। जो उसके अगले दिन सोमवार यानी 2 सितंबर को सुबह 8 बजकर 58 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में जो लोग उदयीमान तिथि में व्रत रखना चाहते हैं वे दो सितंबर को व्रत रखें। एक सितंबर को भी व्रत रख सकते हैं।