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श्राप से मुक्ति पाने के लिए यहां विजयदशमी के दिन युद्घ करते हैं लोग

Wed, 12 Oct 2016 08:25 AM IST
सुपा सिंह बिष्ट/ अमर उजाला, सहिया
सुपा सिंह बिष्ट/ अमर उजाला, सहिया Updated Wed, 12 Oct 2016 08:25 AM IST
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gagli yudh in jaunsar bawar
gagli yudh

देहरादून जिले के उत्पाल्टा और कुरोली गांव में लोग श्राप से मुक्ति पाने के लिए युद्घ करते हैं। सदियों पुरानी मान्यता का निर्वहन करते हुए दशहरे के दिन जिले के उत्पाल्टा और कुरोली गांव के लोगों के बीच करीब एक घंटे तक भीषण गागली युद्ध हुआ। इसके बाद दोनों गांवों के लोगों ने एक दूसरे को गले मिलकर पाइता पर्व की बधाइयां दीं। सैकड़ों लोगों ने दो सगी बहनों की घासफूस की प्रतिमा को कुएं में विसर्जित किया।

gagli yudh in jaunsar bawar
gagli yudh

सुबह थाती-माठी (गांव का मूल स्थान) और गांव के कुल देवता बत्तिसर देव की पूजा की गई। दशहरे के दिन जब पूरा देश रावण दहन कर अपने अंदर की बुराइयों को खत्म करने का संकल्प लेता है, उसी दिन देहरादून जिले में जौनसार बावर क्षेत्र के दो गांवों में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिलता है। इस दिन यहां दशहरे के स्थान पर पाइता पर्व मनाया जाता है। दोनों गांवों के लोग पश्चाताप के रूप में अरबी के डंठलों के गागली युद्ध करते हैं। इस युद्ध में किसी की भी हार जीत नहीं होती है।
 

gagli yudh in jaunsar bawar
gagli yudh

परंपरा के अनुसार ग्रामीणों ने दो सगी बहनों रानी और मुन्नी के प्रतीक स्वरूप घासफूस की प्रतिमाएं अष्टमी के दिन बनाईं थी। मंगलवार को दोनों की प्रतिमाओं को लेकर लोग ढोल नगाड़ों के साथ क्याणी डांडा पहुंचे। यहां प्रतिमाओं को कुएं में विसर्जित किया गया। इसके बाद लोगों ने गागली (अरबी) के डंठल एक दूसरे पर फेंके। इसे स्थानीय भाषा में हेलरियाट कहा जाता है। करीब एक घंटे तक चले युद्ध के बाद लोगों ने पाइता पर्व की एक-दूसरे को बधाई दी।
 

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किवदंतियों के अनुसार करीब 200 साल पहले रानी और मुन्नी नाम की दो बहनें थीं। दोनों साथ-साथ कुएं में पानी भरने जाती थीं। एक दिन रानी की कुएं में गिरने से मौत हो गई। लोगों ने रानी की मौत के लिए मुन्नी को दोषी ठहराया। इससे खिन्न होकर मुन्नी ने भी कुएं में छलांग लगाकर जान दे दी। बहनों की मौत के श्राप से बचने के लिए लोग महासू देवता की शरण में गए। प्रतिमाओं को कुएं में विसर्जित करने से पहले रानी और मुन्नी की प्रतिमाओं के लिए रोटी, पूड़ी, हलवा और चूड़े तैयार किए जाते हैं। इन्हें भोग स्वरूप प्रतिमाओं को लगाया जाता है।
 

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gagli yudh

देवता ने श्राप से बचने के लिए दोनों बहनों की घासफूस की प्रतिमाओं को दशहरे के दिन कुएं में विसर्जित करने की बात कही। तब से उत्पाल्टा में पाइता पर्व मनाने की परंपरा शुरू हो गई। लोग दशहरे के दिन पश्चाताप स्वरूप गागली युद्ध करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक गांव में दशहरे के दिन दो कन्याओं का जन्म नहीं हो जाता तब तक यह परंपरा जारी रहेगी। ताकि गांव को किसी अनहोनी से बचाया जा सके। 
 

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