कोरोना संक्रमण के कारण तीन महीने के लिए लगे लॉकडाउन ने उत्तराखंड को कई तरह से नुकसान पहुंचाया। प्रदेश की विकास दर शून्य से भी नीचे पहुंच गई। ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भले ही कुछ हद तक बच पाई हो लेकिन कोरोना का संक्रमण प्रदेश के पर्यटन से लेकर कारोबार तक को प्रभावित कर गया।
लॉकडाउन का एक साल: कोरोना की चपेट में रहे सीएम से लेकर मंत्री, पहली बार हुए कुछ फैसले, विपक्ष भी रहा मुखर
विधानसभा का हाईब्रिड सत्र
कोरोना संक्रमण के कारण विधानसभा को भी अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ी थी। खुद विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल कोरोना से संक्रमित हुए और इस कारण विधानसभा सत्र की जिम्मेदारी विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान को संभालनी पड़ी थी। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश भी संक्रमण के कारण सत्र में शामिल नहीं हो पाई थीं।
आर्थिक तंगी के चलते सरकारी कर्मचारियों का कटा वेतन
कोरोना संक्रमण की मार राजकीय कर्मचारियों पर भी पड़ी। सरकार को उनके एक दिन का वेतन काटने का फैसला करना पड़ा। विभागों का 50 प्रतिशत बजट फ्रीज किया गया और वित्त विभाग का स्पष्ट आदेश था कि फ्रीज किए गए बजट का उपयोग केवल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ही किया जाए।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ाई
कोरोना की मार से प्रभावित प्रदेश की अर्थव्यवस्था अभी तक पटरी पर नहीं आ पाई है। वर्तमान में भी प्रदेश की आर्थिक विकास दर शून्य से नीचे ही मानी जा रही है। राहत की बात यह है कि अगले वित्तीय वर्ष में इसकी भरपाई होने की उम्मीद है। इतना होने पर भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था की धुरी माना जाता पर्यटन खासा प्रभावित हुआ। इसका असर कारोबार पर भी पड़ा। 12 हजार करोड़ रुपये के कारोबार वाली चार धाम यात्रा बिलकुल ही ठप होकर रह गई। इसका असर शहरी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर अधिक पड़ा और बेरोजगारी दर में तेजी से इजाफा हुआ।
महंगाई में इजाफा, विपक्ष को भी मिला मौका
कोरोना का एक नुकसान प्रदेश की महंगाई की दर पर भी पड़ा। प्रदेश में महंगाई दर पहले से ही राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है। कोरोना काल में इसमें और इजाफा हुआ। यही वजह रही कि महंगाई को लेकर विपक्ष भी इस दौरान खासा मुखर रहा।