पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब 'मोदी सेना' का ये कदम कांग्रेस के लिए खतरा साबित हो सकता है। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के दौरान सियासी बढ़त हासिल करने के लिए भाजपा कांग्रेस के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद 'मोदी सेना' के इस कदम से हिलने लगी कांग्रेस की 'नींव'
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रक्षा मंत्री मनोहर परिकर के उत्तराखंड में बढ़ते दौरे भी कांग्रेस के लिए चिंता का सबब बन गए हैं। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भाजपा के ग्राफ में आए बंपर उछाल का ही नतीजा है कि राज्य सरकार ने शुक्रवार को आनन-फानन में कैबिनेट बुलाकर पूर्व सैनिकों के हित में कई घोषणाएं कर डाली।
उधर प्रधानमंत्री मोदी के सर्जिकल स्ट्राइक के फैसले से गदगद भाजपा भी कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है वह भी बेहद सुनियोजित तरीके से फौजियों को अपने और करीब लाने की मुहिम में जुटी है।
उत्तराखंड में सैनिकों और अर्द्धसैनिकों की पांच लाख का संख्या बल विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर प्रत्याशियों का भविष्य तय करने के साथ सरकार बनाने की स्थिति में है। राज्य गठन के बाद तीन लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो सैनिकों के पोस्टल बैलेट का 80 फीसदी भाजपा को मिलता रहा है। कुमाऊं की अपेक्षा गढ़वाल में पूर्व सैनिकों की संख्या दोगुने से अधिक है।
गढ़वाल में पौड़ी, टिहरी, देहरादून, उत्तरकाशी जनपद में दो दर्जन से अधिक सीटें फौजी मतों से प्रभावित हैं। जबकि कुमाऊं में अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और नैनीताल में पूर्व सैनिकों का अच्छा खासा मत है।