उत्तराखंड के जुम्मा गांव (पिथौरागढ़) में बादल फटने से भारी तबाही मची है। गांव को जोड़ने वाले छह पैदल पुल बह गए। नालों के उफान में छह घराट भी बह गए। आठ मवेशियों की मौत हो गई। गांव में दहशत का माहौल है। जुम्मा ग्राम पंचायत के छह गांवों के सैकड़ों परिवार प्रभावित हो गए हैं। जुम्मा गांव 1989 से लगातार भूस्खलन के हादसे झेल रहा है।
उत्तराखंड के धारचूला में बादल फटा, 60 जानवर बहे, तहस-नहस हुआ गांव, तस्वीरें...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तहसील मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर जुम्मा गांव में शनिवार रात करीब साढ़े 12 बजे तेज गरज के साथ मूसलाधार बारिश होने लगी। गांव के पास बहने वाले कुलाघाट नाले का रुख पलट गया और नाले ने विकराल रूप ले लिया। नाले का सारा पानी तेज गति से गांव की ओर आ गया।
पूरा इलाका छिन्न भिन्न हो गया
पानी के तेज बहाव के साथ स्यांबगड़, तल्ला कुलाघाट, मल्ला कुलाघाट, सल्याड़ी और खातपोली को जोड़ने वाले छह पैदल पुल बह गए। गांव के पीछे की पहाड़ी में हुए भूस्खलन के साथ निकले बड़े बड़े बोल्डर गांव की सीमा तक आ गए। भूस्खलन के कारण धरती हिलने लगी और घबराहट में लोग घरों से बाहर निकलकर पेड़ों की आड़ में बैठे रहे। पूरी रात लोगों को दहशत में गुजारनी पड़ी।
घटना की सूचना मिलते ही आज सुबह तहसीलदार आईबी मल्ल, खंड विकास अधिकारी एलडी जोशी, जुम्मा के पटवारी नंदलाल, ग्राम पंचायत अधिकारी दीपक कुमार ने जुम्मा जाकर स्थिति की जानकारी ली। तहसीलदार ने बताया कि जुम्मा में हालात काफी खराब हो गए हैं। उन्होंने लोगों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। क्षेत्र पंचायत सदस्य बिशन सिंह धामी, सोहन सिंह बिष्ट तथा ग्राम प्रधान राजेंद्री देवी ने कहा कि बादल फटने से फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।
जानवरों के बहने से लोगों को भारी क्षति पहुंची है। उन्होंने बताया कि जुम्मा ग्राम पंचायत के जामुनी तोक के 40 परिवार, खातपोली के 30 परिवार, तुसदानी के 20 परिवार, रैजानी के 30 परिवार, नालपानी के 12 परिवार और नाग के 80 परिवार इस तबाही की चपेट में आए हैं। उन्होंने कहा है कि पूरा इलाका छिन्न भिन्न हो गया है। गांव रहने लायक नहीं है।