जून 2013 में केदारनाथ में आई आपदा से संपूर्ण विश्व का दिल पसीज गया था, लेकिन देश के अफसरों का दिल नहीं पसीजा। उत्तराखंड में वर्ष 2013 में आयी भयावह त्रासदी के बाद देश के 15 राज्यों के 35 सांसदों द्वारा दी गई आर्थिक सहायता को तमाम राज्य दबाए बैठे हैं। 15वीं लोकसभा के 35 सांसदों ने ‘मेबर्स आफ पार्लियामेंट लोकल एरिया डेवलपमेंट स्कीम’ (एमपीलैड्स) के तहत कुल मिलाकर साढ़े चार करोड़ की आर्थिक सहायता दी थी, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही इसमें से अभी तक उत्तराखंड को फूटी कौड़ी भी नहीं मिली।
देखिए कैसे, अफसरशाही ने नहीं भरने दिए केदारनाथ आपदा के जख्म
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब इसे लेकर केंद्र ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को कड़ी फटकार लगाई है। एमपीलैड्स के निदेशक ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि वे सांसदों द्वारा दी गई सहायता को तत्काल उत्तराखंड को मुहैया कराएं।
उत्तराखंड त्रासदी के बाद उत्तराखंड के सांसद सतपाल महाराज, यूपी के चार सांसदों रेवतीरमण सिंह, शैलेंद्र कुमार, कपिलमुनि करवरिया, उषा वर्मन और श्रीप्रकाश जायसवाल के अलावा कर्नाटक, गोवा, ओडिसा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, बिहार, आसाम, आंध्रप्रदेश समेत 15 राज्यों के 35 सांसदों ने कुल मिलाकर साढ़े चार करोड़ की आर्थिक सहायता दी थी।
अब एमपीलैड्स के निर्देशक पी. साईबाबा ने सभी राज्यों के प्रमुख सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि वे सांसदों द्वारा स्वीकृत सहायता राशि को तत्काल उत्तराखंड सरकार को मुहैया कराएं, ताकि इस बजट से आपदा से प्रभावित लोगों को राहत सहायता देने के साथ ही जरूरी विकास कार्य कराए जा सकें। वहीं प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास मनीषा पंवार ने जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग से इस संबंध में जानकारी मांगी है। साथ ही यह भी निर्देशित किया कि इस संबंध में सीधे केंद्र से लिखापढ़ी करें।