आधुनिकता के इस दौर में आचार्य बालकृष्ण ने आयुर्वेद और हरबल को एक नया आयाम दिया है। अपने अलग वर्किंग स्टाइल से आज वह देश के सबसे अमीर लोगों में शामिल हुए हैं। आइए जानते हैं बालकृष्ण के बारे में कुछ खास बातें...
इन 10 खास बातों ने आचार्य बालकृष्ण को आम आदमी से बनाया अमीर
पतंजलि आयुर्वेद आज देश और दुनियाभर की एक जानीमानी संस्था है। इसकी सफलता के पीछे आचार्य बालकृष्ण का हाथ है। बालकृष्ण ने कंपनी को बहुत ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। पतंलजि आयुर्वेद का वर्क कल्चर एकदम अलग है। यहां हर कोई ओम का उच्चारण कर एक-दूसरे का अभिवादन करता है। इसके साथ ही यहां मांस खाने, शराब पीने और धूम्रपान करना प्रतिबंधित है।
बालकृष्ण आईफोन का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनके वर्कस्टेशन पर कंप्यूटर नहीं है। धोती और कुर्ते में रहने वाले बालकृष्ण अपनी डेस्क पर प्रिंट डॉक्यूमेंट्स पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं। आचार्य शुद्ध हिंदी में बात करते हैं। बाबा रामदेव के भरोसेमंद बालकृष्ण की पतंजलि आयुर्वेद में 94 पर्सेंट की हिस्सेदारी है। वह कंपनी से कोई सैलरी नहीं लेते। साल के हर दिन वह काम करते हैं। वह 15 घंटे काम करते हैं।
एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में बालकृष्ण ने कहा कि 'मैं प्रतिदिन सुबह 7 बजे से रात को 10 बजे तक काम करता हूं। एक आम आदमी दिन में 8 घंटे ही काम करता है, लेकिन मैं सप्ताह के हर दिन 15 घंटे वर्क करता हूं। मैं पांच लोगों का काम अकेले करता हूं।'
बालकृष्ण की मेहनत से कुछ ही सालों में पतंजलि आयुर्वेद 5,000 करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनी बन गई है। पतंजलि की मार्केटिंग की रणनीति पुराने तौर-तरीकों पर चलती है। दूसरी कंपनियां जहां नए प्रॉडक्ट्स की लॉन्चिंग में हिचकिचाती हैं, वहीं पतंजलि के लिए यह कोई चिंता की बात नहीं है।