प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूं तो चुनावी सभाओं में कई बार उत्तराखंड आए, किंतु पतंजलि योगपीठ में पहली बार आ रहे हैं।
...तो इसलिए PM मोदी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं योगगुरु बाबा रामदेव
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यह वही योगपीठ है, जहां स्वामी रामदेव के नेतृत्व में हरिद्वार के सभी प्रमुख संतों ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया था। संतों की राय कुछ इस तरह परवान चढ़ी कि भाजपा को उन्हें ही प्रधानमंत्री प्रत्याशी घोषित करना पड़ा। इस समय समूची पतंजलि योगपीठ, फूड पार्क, बॉटोनिकल वाटिका, योग ग्राम तथा फेज टू को सजाने का काम चल रहा है। जिस अनुसंधान केंद्र का प्रधानमंत्री को उद्घाटन करना है, उसे अति भव्यता के साथ सजा दिया गया है।
गौरतलब है कि बाबा रामदेव ने 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में काले धन के खिलाफ पहली बार आवाज बुलंद की थी। तब मामला इतना बढ़ा था कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने समूचा पंडाल ही उखाड़ दिया था। बाद में वर्ष 2013 में बाबा ने नरेंद्र मोदी को पतंजलि योगपीठ बुलाया और उन्हें बतौर प्रधानमंत्री प्रत्याशी घोषित किया।
यद्यपि बाबा का भाजपा से कोई संबंध नहीं है, तथापि बाबा की बात भाजपा में खूब सुनी जाती है। बाबा के आंदोलन और कालेधन के खिलाफ अभियान को भाजपा ने वर्ष 2011 में ही पूर्ण समर्थन दिया था।
मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बाबा ने फिर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के साथ बैठक कर काले धन के खिलाफ जानकारी सरकार को सौंपी। इसी पर सरकार ने नोटबंदी का निर्णय कर कालाधन बाहर निकालने का फैसला किया। तथापि बाबा की प्रमुख मांग विदेशों में छिपा काला धन अभी तक भी भारत नहीं आ पाया है।