उत्तराखंड में भाजपा सरकार ने आबकारी नीति में कई तरह के संशोधन कर दिए हैं। जिसके बाद अब शराब परचून की चुकानों में भी मिलेगी।
आबकारी नीति में ताजा संशोधन को राज्य कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब विदेशी शराब और वाइन मोहल्ले की परचून की दुकान में भी उपलब्ध हो सकेगी। बस इसके लिए शर्त यह होगी कि दुकानदार का सालाना टर्नओवर पचास लाख हो और वह लाइसेंस फीस के एवज में पांच लाख जमा कर सके। इसके साथ ही बार लाइसेंस भी अब एक के बजाए तीन साल के लिए मिल सकेगा। कुल मिलाकर ताजा फैसलों से शराब की बिक्री में पंख लगने तय हैं।
राज्य कैबिनेट की बैठक शुक्रवार की शाम पांच बजे सचिवालय में शुरू हुई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में मात्र दो विभागों के प्रस्ताव पास किए गए। इसमें आबकारी विभाग की ओर से आबकारी नीति में संशोधन संबंधी प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। इसके तहत शराब की दुकानों के समूहों के आवंटन की व्यवस्था रद्द कर दी गई है।
गौरतलब है कि बीते दिनों जारी आबकारी नीति में बीस किलोमीटर के भीतर चार दुकानों के समूहों का आवंटन एक व्यक्ति या फर्म को दिया जा सकता था, लेकिन इसमें विवाद उत्पन्न होने के बाद इससे हाथ पीछे खींच लिए गए। इसके अलावा, 20 कमरों तक के होटल में दिए गए बार की लाइसेंस फीस को पांच लाख से घटाकर तीन लाख कर दिया गया है। साथ ही इनका रिन्यूअल हर साल के बजाए तीन साल में एक बार किया जाएगा।
तीन साल की फीस एक साथ जमा करने पर लाइसेंस फीस में दस फीसदी की छूट भी दी जाएगी। वहीं, डिपार्टमेंटल स्टोर के लिए अनुज्ञापन शुल्क तीन लाख से बढ़ाकर पांच लाख कर दिया गया है। हालांकि, इनके लिए टर्नओवर की सीमा घटाकर पांच करोड़ से सीधे पचास लाख कर दी गई है। वहीं, बार लाइसेंस धारकों के लिए पके भोजन की बिक्री की सीमा 12 लाख से घटाकर 10 लाख कर दी गई है।