सौरव गांगुली भारतीय टीम के दमदार खिलाड़ी और कप्तान रह चुके हैं। उनकी कप्तानी में ही टीम इंडिया ने 2003 विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई थी। पाकिस्तान को उसी की जमीं पर हराया था, लेकिन क्या आपको पता है कि टीम इंडिया के इस बॉस को एकबार उनकी लेटलतीफी के लिए सजा भी मिल चुकी है।
टीम इंडिया को सहवाग, जहीर, भज्जी जैसे खिलाड़ी देने वाले इस दबंग कप्तान को सबक सिखाया था रवि शास्त्री ने। बात 2007 की है। तब गांगुली के सितारे गर्दिश में चल रहे थे। टीम की कप्तानी उनसे छिनकर राहुल द्रविड़ को सौंप दी गई थी और दादा सिर्फ टेस्ट मैच में खेला करते थे, उन्हें वनडे टीम से भी बाहर कर दिया गया था।
मौजूदा दौर में टीम इंडिया के हेड कोच रवि शास्त्री, उन दिनों भारतीय टीम के मैनेजर हुआ करते थे। टीम बांग्लादेश दौरे पर थी। यह घटना तब हुई जब 'मेन इन ब्लू' सीरीज के अपने पहले प्रेक्टिस सेशन के लिए रवाना होने वाली थी।
टीम को सुबह 9 बजे अभ्यास सत्र के लिए चिटगांव रवाना होना था। अनुशासन और समय की पाबंदी के लिए पहचाने जाने वाले रवि शास्त्री ठीक 9 बजे बस के साथ निकलने के लिए तैयार थे। मगर तभी स्थानीय मैनेजर ने बताया कि, थोड़ा इंतजार करना होगा, दादा (सौरव गांगुली) अब तक नहीं पहुंचे हैं। तब शास्त्री तपाक से बोल पड़े, दादा को छोड़ो वह कार से आ सकते हैं।
इसके बाद टीम अपने पहले अभ्यास सत्र के लिए गांगुली के बिना ही रवाना हो गई। शास्त्री की माने तो इसके बाद सौरव में गजब का बदलाव आया। वह हर बार 10 मिनट पहले ही पहुंच जाते थे। इस मजेदार किस्से का खुलासा खुद रवि शास्त्री ने एक इंटरव्यू में किया। बकौल शास्त्री, 'मुझे लेटलतीफी कतई पसंद नहीं। खेल में आपका अनुशासन बेहद अहम होता है। अगर बस 9 बजे निकलनी थी तो 9 बजे ही निकलेगी।'