टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली की असाधारण बल्लेबाजी, जसप्रीत बुमराह का हर प्रारूप की कसौटी पर खरा उतरना और अगले वर्ष इंग्लैंड में होने वाले विश्व कप के लिए नए कोर ग्रुप की पहचान। दक्षिण अफ्रीका दौरे में ऐतिहासिक सफलताओं के बीच ये चंद सकारात्मक पहलू हैं, जिसने सात हफ्ते के इस दौरे को और भी कामयाब बना दिया।
दक्षिण अफ्रीका में मिला टीम इंडिया को वर्ल्ड कप जीतने का फॉर्मूला नंबर वन, यह रही पूरी थ्योरी
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पांच गेंदबाजों की थ्योरी तैयार
वन-डे सीरीज में कलाई के स्पिनरों युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव छा गए। दोनों ने छह मैचों में 33 विकेट लिए। साथ ही यह भी साबित किया कि वो सफलता के लिए टर्निंग ट्रैक पर निर्भर नहीं हैं। भुवनेश्वर, हार्दिक पांड्या और बुमराह ने अपनी ऑलराउंड क्षमताओं से विश्व कप की योजना के तहत पांच गेंदबाजों की खोज लगभग पूरी कर दी है। यह भी तय हो गया है कि धोनी विश्व कप 2019 से पहले ग्लव्स टांगने नहीं जा रहे हैं।
बल्लेबाजी में पहले तीन क्रम पर शिखर धवन, रोहित शर्मा और विराट कोहली पूरी तरह जम चुके हैं। बस नंबर चार, पांच और छह को लेकर खींचतान है। मगर उसके लिए पांच विकल्पों में अच्छी होड़ मची है। अजिंक्य रहाणे 2015 में ऑस्ट्रेलिया में हुए पिछले विश्व कप में सफल रहे थे। हालांकि मिडिल ओवरों में उनकी स्ट्राइक रेट पर सवाल हैं।
मनीष पांडे ने भी मौका मिलने पर अपनी प्रतिभा साबित की है। केदार जाधव अच्छे स्ट्रोक प्लेयर हैं, उनकी धीमी गेंदबाजी अतिरिक्त योग्यता मानी जा रही है। श्रेयस अय्यर घरेलू क्रिकेट में अच्छा करते रहे हैं। एक साल बाद टी-20 में सफल वापसी करने वाले सुरेश रैना भी दस्तक दे रहे हैं। सीरीज के तीसरे टी-20 मैन ऑफ द मैच रैना की वापसी की संभावनाएं प्रबल हुई हैं।
'किंग' कोहली का रुतबा कायम
भारतीय बल्लेबाजी टेस्ट मैचों में कसौटी पर ज्यादा खरी नहीं उतरे लेकिन कप्तान कोहली फिर भी अग्रिम मोर्चे से नेतृत्व करते आए। उन्होंने 286 रन बनाए जोकि दक्षिण अफ्रीका सफल बल्लेबाज एबी डीविलियर्स के 211 रन से 75 ज्यादा थे। कोहली ने न तो अपनी आक्रामक कप्तानी के तेवर बदले और न ही हर मैच में अंतिम एकादश बदलने का तरीका बदला। लंबे प्रारूप में इसका ज्यादा फायदा नहीं मिला साथ ही उनका अजिंक्य रहाणे के मुकाबले रोहित शर्मा की काबलियत पर ज्यादा भरोसा करने की नीति की भी आलोचना हुई।