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सोनल दिनुषा कैसे बने श्रीलंका की दीवार?: उधार के बल्ले से भारत के खिलाफ रचा इतिहास; पढ़ें उनके संघर्ष की कहानी

Sun, 30 Aug 2026 01:38 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: स्वप्निल शशांक Updated Sun, 30 Aug 2026 01:38 PM IST
सार

श्रीलंका के 25 वर्षीय ऑलराउंडर सोनल दिनुषा ने भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 420 रन बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, लेकिन इस सफलता के पीछे संघर्ष, परिवार और घंटों की मेहनत की कहानी है। कभी उनके पास बल्ला खरीदने तक के पैसे नहीं थे और बहन ने उधार लेकर पहला बल्ला दिलाया था। आज वही खिलाड़ी भारतीय स्पिनरों के खिलाफ अपनी स्वीप बल्लेबाजी से टेस्ट मैच बचाने वाला सितारा बन चुका है।

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From a Bat Bought on Borrowed Money to Stalling India: The Remarkable Rise of Sonal Dinusha
सोनल दिनुषा - फोटो : IANS

विस्तार

कोलंबो में भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज खत्म हुई तो स्कोरकार्ड पर कई बड़े नाम दिखाई दिए, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा एक ऐसे खिलाड़ी की हुई, जिसके पास कभी क्रिकेट खेलने के लिए अपना बल्ला तक नहीं था। पांच टेस्ट पुराने सोनल दिनुषा ने दो टेस्ट की सीरीज में चार पारियों में तीन शतक की मदद से 420 रन बनाए और भारत के खिलाफ श्रीलंका की बल्लेबाजी के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे। दिलचस्प बात यह है कि भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ लगातार बड़ी पारियां खेलने के बाद भी दिनुषा के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि शायद रन या शतक नहीं हैं। उनकी कहानी उस पहले बल्ले से शुरू होती है, जिसे खरीदने के लिए उनकी बहन को पैसे उधार लेने पड़े थे।
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सोनल दिनुषा - फोटो : IANS
जब बल्ला खरीदना भी परिवार के लिए मुश्किल था
 
  • दिनुषा का बचपन क्रिकेट की चमक-दमक से दूर था। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि क्रिकेट का महंगा सामान आसानी से खरीदा जा सके। शुरुआत में तो उन्हें क्रिकेट में आने की भी योजना नहीं थी। उनकी दिलचस्पी बास्केटबॉल में थी।
  • फिर स्कूल के कोच सुसंथा फेलिक्स डियास की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने दिनुषा को क्रिकेट खेलते देखा और उन्हें स्कूल की क्रिकेट टीम में शामिल कर लिया। समस्या यह थी कि टीम में जगह तो मिल गई, लेकिन उनके पास क्रिकेट का बल्ला नहीं था।
  • तभी परिवार ने उनके सपने को सहारा दिया। बहन ने पैसे उधार लेकर छोटे भाई के लिए पहला क्रिकेट बैट खरीदा। वह बल्ला सिर्फ क्रिकेट का सामान नहीं था, बल्कि दिनुषा के सफर की पहली बड़ी सीढ़ी था।
  • उनके कोच अशान प्रियांजन बताते हैं, 'उसकी बहन ने कुछ पैसे उधार लेकर उसके लिए बल्ला खरीदा। यह उसका पहला क्रिकेट बल्ला था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी।' यही वजह है कि दिनुशा के लिए क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं रहा। यह धीरे-धीरे उनकी जिंदगी का रास्ता बन गया।
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सोनल दिनुषा - फोटो : IANS
12 साल की उम्र में दिख गया था जुनून
दिनुषा ने कोलंबो के डी ला सैले कॉलेज से क्रिकेट की शुरुआत की और बाद में प्रतिष्ठित महामाना कॉलेज पहुंचे। स्कूल क्रिकेट ने उनके खेल को आकार देने में बड़ी भूमिका निभाई। उनके शुरुआती कोचों में से एक सोनल दुल्शन एलवालेज ने उन्हें महज 12 साल की उम्र में देखा था। उम्र छोटी थी, लेकिन क्रिकेट के प्रति उनका जुनून असाधारण था। दिनुषा के कोचों को जल्दी समझ आ गया था कि यह खिलाड़ी सिर्फ प्रतिभा के भरोसे आगे नहीं बढ़ना चाहता। वह अपनी कमियों को पहचानता था और फिर उन्हें दूर करने के लिए मेहनत करता था।

महामाना कॉलेज में खेलते हुए उनकी कई पारियां यादगार रहीं। इनमें 2020 में रिचमंड कॉलेज के खिलाफ अंडर-19 मुकाबले की पारी खास थी। 19 साल की उम्र में दिनुषा ने नाबाद 159 रन बनाए और अंत तक क्रीज पर टिके रहे। यह सिर्फ बड़ी पारी नहीं थी। यह उस बल्लेबाज की झलक थी, जो टीम को जीत तक पहुंचाने के लिए जरूरत पड़ने पर घंटों बल्लेबाजी कर सकता था।
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सोनल दिनुषा - फोटो : IANS
18 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास डेब्यू
दिनुषा की मेहनत ने उन्हें जल्दी ही स्कूल क्रिकेट से आगे पहुंचा दिया। 2018 में, 18 साल के होने से कुछ ही दिन पहले, उन्होंने कोलंबो क्रिकेट क्लब के लिए फर्स्ट क्लास डेब्यू किया। पहला मुकाबला भी आसान नहीं था। सामने ऐसा गेंदबाजी आक्रमण था जिसमें धम्मिका प्रसाद, नुवान प्रदीप और सचित्र सेनानायके जैसे अनुभवी गेंदबाज शामिल थे।

दिनुषा को उनकी सामान्य बल्लेबाजी स्थिति से हटकर नंबर तीन पर उतारा गया। वह टीम के लिए आमतौर पर नंबर छह के बल्लेबाज थे, लेकिन टीम संतुलन के लिए उन्हें ऊपर भेजा गया। उन्होंने मौके का फायदा उठाते हुए अर्धशतक जमाया। अशान प्रियांजन आज भी उस मैच को याद करते हैं। उनके मुताबिक दिनुशा ने पहली ही फर्स्ट क्लास पारी में दिखा दिया था कि दबाव में भी वह अपने खेल को समझते हैं। यहीं से उनकी एक खास पहचान बनने लगी, समस्या देखो, उसका समाधान खोजो और फिर मैदान पर उसे लागू कर दो।

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सोनल दिनुषा - फोटो : IANS
ऑस्ट्रेलिया में बाउंसर से परेशानी हुई तो...
दिनुषा की यह आदत सिर्फ भारत के खिलाफ नहीं दिखी। जुलाई 2025 में श्रीलंका ए टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उन्हें तेज गेंदबाजों के बाउंसर ने परेशान किया। ऑस्ट्रेलिया ए के लंबे कद के तेज गेंदबाज लगातार छोटी गेंदें फेंक रहे थे। दिनुषा को समस्या हुई, लेकिन उन्होंने घबराने के बजाय कोच से बात की। फिर उन्होंने उसी समस्या के लिए अभ्यास शुरू कर दिया। थ्रोडाउन के जरिए छोटी गेंदों का सामना किया, रणनीति बनाई और दोबारा मैदान पर लौटे। नतीजा यह रहा कि उन्होंने पहले अनौपचारिक टेस्ट में 145 गेंद पर 105 रन की पारी खेल दी। यही दिनुषा की सबसे बड़ी खासियत है, वह अपनी कमजोरी को छिपाने की कोशिश नहीं करते, बल्कि उसे अगली ट्रेनिंग का विषय बना देते हैं।

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सोनल दिनुषा - फोटो : IANS
भारत के स्पिनरों के खिलाफ स्वीप बना सबसे बड़ा हथियार
भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उनकी यही सोच सबसे ज्यादा नजर आई। रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार और सारांश जैन जैसे स्पिनरों के सामने दिनुषा ने स्वीप को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया। दो टेस्ट मैचों में उन्होंने कुल 420 रन बनाए। इनमें 173 रन सिर्फ स्वीप शॉट से आए। यह आंकड़ा अपने आप में उनकी तैयारी की कहानी कहता है। स्पिन के खिलाफ स्वीप खेलने की कला में उन्होंने इंग्लैंड के दिग्गज जो रूट को भी पीछे छोड़ दिया, जिन्होंने एक टेस्ट सीरीज में स्वीप से 160 रन बनाए थे, लेकिन इस शॉट के पीछे भी वर्षों की मेहनत है। प्रियांजन बताते हैं कि उन्होंने दिनुशा से कहा था कि अगर स्पिनरों के खिलाफ सफल होना है तो स्वीप शॉट शानदार होना चाहिए। इसके बाद दिनुषा ने करीब दो घंटे तक नेट्स में सिर्फ इसी शॉट का अभ्यास किया। दिनुषा ने इसे अपनी ताकत बनाया और भारत के स्पिन आक्रमण के खिलाफ लगातार उसका इस्तेमाल किया।

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सोनल दिनुषा - फोटो : IANS
133 रन की पारी ने भारत की जीत रोक दी
कोलंबो टेस्ट में दिनुशा की 264 गेंदों पर 133 रन की पारी उनकी मानसिक मजबूती का सबसे बड़ा उदाहरण रही। भारत जीत के बेहद करीब था, लेकिन दिनुषा ने क्रीज पर डटे रहकर उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। श्रीलंका के मुख्य कोच गैरी कर्स्टन भी उनकी बल्लेबाजी से बेहद प्रभावित हुए। कर्स्टन के मुताबिक दिनुषा टेस्ट क्रिकेट के बारे में सोचते हैं, अपनी ताकत के हिसाब से खेलते हैं और गेंदबाजों की योजना को समझकर उसका जवाब देते हैं। उन्होंने इस पारी को श्रीलंकाई टेस्ट क्रिकेट की बेहतरीन पारियों में शामिल होने लायक बताया। यह तारीफ इसलिए भी खास है क्योंकि दिनुषा अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने शुरुआती दौर में हैं।

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सोनल दिनुषा को शाबाशी देते श्रीलंकाई खिलाड़ी - फोटो : IANS
मैच खत्म हुआ, लेकिन दिनुषा के लिए कहानी नहीं
आमतौर पर टेस्ट मैच में ऐसी पारी खेलने के बाद खिलाड़ी आराम करता है, परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताता है या टीम के साथ जश्न मनाता है। दिनुषा ने कुछ और चुना। भारत की जीत रोकने के कुछ ही घंटों बाद उन्होंने अपने कोच प्रियांजन को फोन किया और अगले दिन नेट्स पर अभ्यास करने की इच्छा जताई। वजह थी, उन्हें सीसीसी के लिए टी20 लीग में खेलना था। यानी जिस खिलाड़ी ने अभी-अभी भारत के खिलाफ 133 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी, उसके दिमाग में अगला मुकाबला था। प्रियांजन कहते हैं, 'उसने अगले दिन फोन किया। वह 28 अगस्त को सीसीसी के लिए टी20 लीग टूर्नामेंट की तैयारी के लिए अभ्यास करना चाहता है।' 31 अगस्त को उन्हें मेजर लीग 50 ओवर टूर्नामेंट में खेलना था और अगले ही दिन टी20 मुकाबला। यही दिनुशा हैं, एक पारी खत्म होते ही अगली चुनौती की तैयारी शुरू।

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सोनल दिनुषा प्लेयर ऑफ द मैच बने कोलंबो टेस्ट में - फोटो : IANS
संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ, सफर अभी शुरू हुआ है
सोनल दिनुषा की कहानी सिर्फ 420 रन, तीन शतक या भारतीय स्पिनरों के खिलाफ 173 स्वीप रनों की कहानी नहीं है। यह उस बच्चे की कहानी है जिसके पास कभी अपना बल्ला नहीं था। उस बहन की कहानी है जिसने पैसे उधार लेकर भाई के सपने को थामा। उन कोचों की कहानी है जिन्होंने उसकी प्रतिभा में भरोसा किया। और उस खिलाड़ी की कहानी है जिसने हर कमजोरी को अभ्यास का कारण बना दिया। श्रीलंका को शायद एक ऐसा क्रिकेटर मिल गया है, जिसके पास प्रतिभा के साथ-साथ वह गुण भी है जो लंबे करियर बनाते हैं, अनुशासन, आत्मविश्वास और सीखने की भूख। पहला बल्ला उधार के पैसों से आया था, लेकिन अब दिनुषा अपनी जगह मेहनत से बना रहे हैं।
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