टीम इंडिया के तत्कालीन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी द्वारा मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम पर 2011 विश्व कप के फाइनल में लगाया छक्का कोई क्रिकेट फैन भूल नहीं सकता। नुवान कुलसेकरा की गेंद पर लांग ऑन के ऊपर से छक्का जमाकर धोनी ने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर सहित देश का सपना साकार किया था। टीम इंडिया ने 28 साल के बाद विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था।
मैच विजयी पारी खेलने वाले कप्तान एमएस धोनी श्रीलंका के खिलाफ फाइनल मैच में युवराज सिंह से पहले बल्लेबाजी करने उतरे। जब धोनी बल्लेबाजी करने आए तब टीम इंडिया ने 275 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए तीन विकेट खोकर 114 रन बनाए थे। श्रीलंकाई तेज गेंदबाज लसिथ मलिंगा ने टीम इंडिया के दोनों धाकड़ ओपनर्स वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर को पवेलियन भेजा। इसके बाद गौतम गंभीर और कोहली ने अच्छी साझेदारी करके टीम को 100 रन के पार लगाया। तिलकरत्ने दिलशान ने कोहली का कैच अपनी ही गेंद पर लपककर श्रीलंका की वापसी कराई।
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gautam gambhir sachin tendulkar
कोहली के विकेट के बाद युवराज सिंह को बल्लेबाजी के लिए आना था। हालांकि, भारतीय कप्तान धोनी ने युवी से पहले क्रीज पर जाने का फैसला किया। यह बड़ा दांव माना जा रहा था क्योंकि युवराज सिंह बेहतरीन फॉर्म में थे। धोनी और गंभीर ने फिर चौथे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी करके टीम इंडिया को लक्ष्य के करीब पहुंचाया। गंभीर शतक जमाने से केवल तीन रन से चूके। इसके बाद कप्तान के साथ क्रीज पर युवराज सिंह आए। फिर वह पल आया जब भारत में जश्न का माहौल जम गया। कप्तान धोनी ने छक्का जमाकर भारत को विश्व चैंपियन बनाया।
युवराज को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। तभी से फैंस के मन में हमेशा से यह सवाल रहा कि आखिर क्यों युवी से पहले धोनी बल्लेबाजी करने आए? अब खुद धोनी ने खुलासा करते हुए इसकी असली वजह बताई है। धोनी ने कहा कि उन्हें महसूस हुआ कि वह श्रीलंकाई स्पिनर्स विशेषकर मुथैया मुरलीधरन का डटकर मुकाबला कर सकते हैं। माही ने कहा, 'मैं अधिकांश श्रीलंकाई गेंदबाजों को अच्छे से जानता था क्योंकि वह पहले चेन्नई सुपरकिंग्स का हिस्सा रह चुके हैं।'
उन्होंने कहा, 'मैं पहले बल्लेबाजी करने आया क्योंकि उस समय मुरलीधरन गेंदबाजी कर रहे थे। मैंने सीएसके के नेट्स पर उनके खिलाफ कई बार बल्लेबाजी की है और मुझे विश्वास था कि उनके खिलाफ खुलकर रन बना सकूंगा। यही प्रमुख कारण था कि मैंने अपने आप को ऊपर बल्लेबाजी करने के लिए उपयुक्त माना।'