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IPL में चीयरलीडर्स की दुनिया का काला सच, जानिए लोगों की चीरती नजरों से लेकर सैलरी तक के राज

Tue, 29 May 2018 08:31 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 29 May 2018 08:31 AM IST
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IPL 2018: Real truth of Cheerleader from behind the screens

हर साल जब भी आईपीएल आता है तो अपने साथ कई रंग लेकर आता है। जैसे विदेशी खिलाड़ियों का देसी रंग में घुलना, स्टेडियम में क्रिकेट के शोर में चीयरलीडर्स का ग्लैमर मिलना, या फिर घरेलू क्रिकेट खेल रहे खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की जर्सी पहनने का ख्वाब देखना।

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आईपीएल में अपने प्रदर्शन के बूते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय टीम में जगह पाने की कई खिलाड़ियों की कहानी आप सुनते-पढ़ते रहते हैं। इस बार आईपीएल के 11वें संस्करण में भी श्रेयस अय्यर, पृथ्वी शॉ, शुभमन गिल के सपनों को पंख लगे हैं।
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लेकिन जो कहानी हम बताने जा रहे हैं वो ना ही केन विलियम्सन या ऋषभ पंत के आईपीएल में बनाए रनों का विश्लेषण है, ना ही किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन पर विशेष टिप्पणी है और ना ही इस बार इंग्लैंड टूर के लिए चुने गए किसी खिलाड़ी की उपलब्धियों का बखान है।
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बल्कि ये कहानी आईपीएल की चकाचौंध की है जो ग्लैमर में गुम हो जाती है और आप तक पहुंच नहीं पाती। कहानी उन चीयरलीडर्स की जो हर साल विदेशों से आईपीएल का हिस्सा बनने आती हैं। इनके बारे में बात तो सब करते हैं, लेकिन क्या कभी इनको जानने की कोशिश की है?

इस साल 8 टीमों में से 6 टीमों की चीयरलीडर्स विदेशी मूल की रहीं हैं जबकि चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के चीयरलीडर्स देसी मूल के रहे। जब हमने दिल्ली डेयरडेविल्स की चीयरलीडर्स से बातचीत की तो उन्होंने दिल खोलकर कई बातें बताई जैसे वो इंतजार कर रहीं थीं कि कोई उनकी भी बात करे।

कौन हैं ये चीयरलीडर्स?

IPL 2018: Real truth of Cheerleader from behind the screens
दिल्ली डेयरडेविल्स की जिन चीयरलीडर्स से हम रूबरू हुए उनमें से चार लड़कियां यूरोप की थीं तो दो ऑस्ट्रेलिया से आई थीं। आईपीएल में ज्यादादातर चीयरलीडर्स यूरोप से आतीं हैं ना की रूस से। ऑस्ट्रेलिया से आई कैथरीन ने बताया कि वह पेशे से डांसर हैं और कई देशों में परफॉर्म कर चुकी हैं। हाल ही में वह 6 महीने के लिए मेक्सिको गईं थीं। कैथरीन बताती हैं, 'तीन साल की उम्र से ही मुझे डांस के लिए जुनून था और यही जुनून मुझे धीरे-धीरे चीयरलीडिंग की प्रोफेशन तक खींच लाया'

चीयरलीडिंग करते-करते उसने तुड़वा ली पसलियां

लेकिन अगर आप ये सोच रहे हैं कि इस प्रोफेशन में आने के लिए केवल डांस ही एक मापदंड है तो इंग्लैंड के मैनचेस्टर से आई डेन बैटमेन जो बता रही है वो आपको चौंकाने के लिए काफी है। डेन बैटमन कहती हैं, 'मैं 11 साल की थी जब मैंने स्कूल में चीयरलीडिंग करना शुरू किया था। स्कूल में चीयरलीडिंग करने के दौरान एक बार मेरी पसलियां टूट गईं थी. मुझे उस चोट से उबरने में काफ़ी वक्त लग गया था।'

डेन बैटमन बताती हैं कि आईपीएल में सिर्फ डांस होता है, लेकिन विदेशों में चीयरलीडर्स को फॉर्मेंशन्स भी बनानी होती हैं जिसके लिए शरीर का लचीला होना बेहद जरूरी है। वो कहती हैं कि यह एक स्पोर्ट्स की ही तरह है। हम उनती ही मेहनत और ट्रेनिंग करते हैं जितनी की मैदान पर खेल रहा खिलाड़ी करता है। डेन बताती है कि वो इससे पहले बॉक्सिंग के खेल के लिए भी चीयरलीडिंग कर चुकी हैं।

चीयरलीडर्स की सैलरी

IPL 2018: Real truth of Cheerleader from behind the screens
जब पुरुष हुआ करते थे चीयरलीडर

चीयरलीडिंग का कल्चर अमरीका में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। यूरोप में भी होने वाले खेलों में इसका चलन है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि चीयरलीडिंग की शुरुआत अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिनिसोटा में हुई थी और इसकी शुरुआत किसी महिला ने नहीं बल्कि पुरुष ने की थी जिनका नाम जॉन कैंपबल था।

यही नहीं, जो चीयर स्क्वॉड उन्होंने बनाया था उसमें सब पुरुष थे। हालांकि 1940 के बाद द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पुरुषों को युद्ध के लिए सीमा पर जाना पड़ा था जिसके बाद महिलाओं की बतौर चीयरलीडर्स भर्ती होने लगी।

खैर इतिहास से आपको वर्तमान में वापस लेकर चलते हैं और अब बात करते हैं चीयरलीडर्स की आमदनी की। हमने इनकी एजेंसी के एक कर्मचारी से संपर्क किया जिसने हमें बताया कि विदेशों से आई चीयरलीडर्स एजेंसियों के जरिए आती हैं और इन्हीं एजेंसियों से करार किया जाता है।

उन्होंने बताया कि आईपीएल में विदेशी मूल की चीयरलीडर लगभग 1500-2000 पाउंड यानी लगभग एक लाख 80 हजार रुपए हर महीने का कमाती हैं। यहां ये बताना भी जरूरी है कि यूरोपियन चीयरलीडर्स और किसी और देश से आई चीयरलीडर्स के वेतन में अंतर होता है।

जब हमने चीयरलीडर्स से वेतन पर उनकी राय जाननी चाही तो दिल्ली डेयरडेविल्स की चीयरलीडर एले ने कहा कि जितनी मेहनत वो करतीं हैं और जिस देश से वो आतीं हैं उस हिसाब से उनकी सैलरी से वह असंतुष्ट है।

 

दर्शकों की नजरें क्या उन्हें चीरती हैं?

IPL 2018: Real truth of Cheerleader from behind the screens
लेकिन सबसे संवेदनशील मामले की तो अभी तक हमने बात ही नहीं की और वो यह कि आखिरकार वह आईपीएल में चीयरलीडिंग करते दौरान कैसा महसूस करतीं हैं। डेन बेटमैन बताती हैं कि भारत में उन्हें आकर बहुत अच्छा लगता है और यहां उन्हें किसी सेलिब्रिटी जैसा मेहसूस होता है. लोग उनका ऑटोग्राफ मांगने आते हैं।

हालांकि दर्शकों को नसीहत देते हुए इंग्लैंड से आईं डेन बेटमैन कहती हैं कि लोगों को ये समझना चाहिए कि हम पोडियम पर डांस करतीं कोई भोग-विलास के लिए बना सामान नहीं हैं। हम लड़कियां हैं जिनका पेशा चीयरलीडिंग है। हमे इंसान की तरह समझा जाए ना की कोई हमारे शरीर पर टिप्पणी करे।

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