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IND W vs SA W: 'अब जीत की आदत बनाना चाहते हैं'; हरमन से दीप्ति तक, चैंपियन खिलाड़ियों ने इस तरह व्यक्त की खुशी
Mon, 03 Nov 2025 12:19 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Mon, 03 Nov 2025 12:19 PM IST
सार
स्मृति मंधाना के लिए पिछले 40 दिन किसी सपने की तरह बीते हैं तो वहीं भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर का कहना है कि अब वे जीत की आदत डालना चाहती हैं। आइए जानते हैं खिताबी जीत के बाद इन खिलाड़ियों ने क्या कहा...
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भारतीय महिला टीम
- फोटो : PTI/BCCI Women
महिला वनडे विश्व कप का खिताब जीतने पर भारतीय खिलाड़ी खुशी से झूम उठी हैं। टीम के खिलाड़ियों ने इस ऐतिहासिक जीत पर प्रतिक्रियाएं दी हैं। स्मृति मंधाना के लिए पिछले 40 दिन किसी सपने की तरह बीते हैं तो वहीं भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर का कहना है कि अब वे जीत की आदत डालना चाहती हैं। भारत ने रविवार को दक्षिण अफ्रीका को हराकर पहली बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। आइए जानते हैं खिताबी जीत के बाद इन खिलाड़ियों ने क्या कहा...
अमनजोत कौर
- फोटो : PTI
वोलवार्ट के कैच को अमनजोत ने बताया महत्वपूर्ण
भारतीय महिला टीम की ऑलराउंडर अमनजोत कौर ने दक्षिण अफ्रीका की कप्तान लाउरा वोलवार्ट का कैच पकड़ा था। वोलवार्ट शतक लगा चुकी थीं और टिकी हुई थीं। इस कैच को लेकर अमनजोत ने कहा, सभी जानते थे कि वह कैच कितना महत्वपूर्ण था। पहले मैं लड़खड़ाई थी। खुशी है कि मुझे वह कैच लेने का दूसरा मौका मिला। मेरे पास व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। इसका बहुत मतलब है। आप भीड़ को बहुत खुश होते देख सकते हैं। सभी, मेरा परिवार, मेरे कोच, मेरा परिवार जो घर पर बैठकर मैच देख रहा था क्योंकि मेरी दादीजी की तबीयत ठीक नहीं है। हमने यह तब किया जब यह सबसे ज्यादा मायने रखता था। यह उनकी भी जीत है। मुंबई, धन्यवाद। यह प्रतिका के लिए है। मैं जानती हूं कि जब आपको चोट के कारण बाहर बैठना पड़ता है तो कैसा महसूस होता है। सब कुछ अच्छा नहीं होता, लेकिन हर चीज में कुछ अच्छा होता है।
भारतीय महिला टीम की ऑलराउंडर अमनजोत कौर ने दक्षिण अफ्रीका की कप्तान लाउरा वोलवार्ट का कैच पकड़ा था। वोलवार्ट शतक लगा चुकी थीं और टिकी हुई थीं। इस कैच को लेकर अमनजोत ने कहा, सभी जानते थे कि वह कैच कितना महत्वपूर्ण था। पहले मैं लड़खड़ाई थी। खुशी है कि मुझे वह कैच लेने का दूसरा मौका मिला। मेरे पास व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। इसका बहुत मतलब है। आप भीड़ को बहुत खुश होते देख सकते हैं। सभी, मेरा परिवार, मेरे कोच, मेरा परिवार जो घर पर बैठकर मैच देख रहा था क्योंकि मेरी दादीजी की तबीयत ठीक नहीं है। हमने यह तब किया जब यह सबसे ज्यादा मायने रखता था। यह उनकी भी जीत है। मुंबई, धन्यवाद। यह प्रतिका के लिए है। मैं जानती हूं कि जब आपको चोट के कारण बाहर बैठना पड़ता है तो कैसा महसूस होता है। सब कुछ अच्छा नहीं होता, लेकिन हर चीज में कुछ अच्छा होता है।
ऋचा घोष
- फोटो : PTI
ऋचा बोलीं- सब कुछ झोंकना चाहते थे
फाइनल में शानदार प्रदर्शन करने वाली ऋचा घोष ने कहा, भावनाएं, सब कुछ पूरी तरह से अलग हैं। हम जानते थे कि यह हमारा आखिरी मैच है और हम इसमें सब कुछ झोंक देना चाहते थे। बस सब कुछ दांव पर लगा दिया। फाइनल का दबाव था लेकिन मैंने एक अच्छा प्रदर्शन किया और यह एक अच्छी बात है। सभी को विश्वास था कि मैं हिट कर सकती हूं और यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है।
फाइनल में शानदार प्रदर्शन करने वाली ऋचा घोष ने कहा, भावनाएं, सब कुछ पूरी तरह से अलग हैं। हम जानते थे कि यह हमारा आखिरी मैच है और हम इसमें सब कुछ झोंक देना चाहते थे। बस सब कुछ दांव पर लगा दिया। फाइनल का दबाव था लेकिन मैंने एक अच्छा प्रदर्शन किया और यह एक अच्छी बात है। सभी को विश्वास था कि मैं हिट कर सकती हूं और यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है।
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प्रतिका रावल
- फोटो : PTI
भारतीय टीम का समर्थन करने के लिए मौजूद रहीं प्रतिका
चोट के कारण टूर्नामेंट के आखिर में बाहर हुईं प्रतिका रावल टीम का समर्थन करने के लिए मैदान पर मौजूद थीं। उन्होंने कहा, मैं पर्याप्त रूप से व्यक्त नहीं कर सकती। मेरा मतलब है कि चोट खेल का एक हिस्सा होती है। मैं बहुत खुश हूं कि मैं इस टीम का, इस विजेता टीम का हिस्सा हूं। मुझे बस यह खेल बहुत पसंद है। मैं इस टीम के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर सकती। इसलिए मैं बहुत खुश हूं कि हमने वास्तव में इसे कर दिखाया। यह बहुत लंबा समय रहा है और पूरा देश, प्रशंसक समर्थन के लिए आए। मेरे लिए बाहर बैठकर मैच देखना हमेशा मुश्किल रहा है, क्योंकि वास्तव में खेलना बहुत आसान है। यह ऊर्जा देखना, यह माहौल देखना, बस इसने मुझे रोमांच दे दिया। जब भी कोई विकेट गिर रहा था, जब भी कोई छक्का लग रहा था तो मैं झूम रही थी।
चोट के कारण टूर्नामेंट के आखिर में बाहर हुईं प्रतिका रावल टीम का समर्थन करने के लिए मैदान पर मौजूद थीं। उन्होंने कहा, मैं पर्याप्त रूप से व्यक्त नहीं कर सकती। मेरा मतलब है कि चोट खेल का एक हिस्सा होती है। मैं बहुत खुश हूं कि मैं इस टीम का, इस विजेता टीम का हिस्सा हूं। मुझे बस यह खेल बहुत पसंद है। मैं इस टीम के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर सकती। इसलिए मैं बहुत खुश हूं कि हमने वास्तव में इसे कर दिखाया। यह बहुत लंबा समय रहा है और पूरा देश, प्रशंसक समर्थन के लिए आए। मेरे लिए बाहर बैठकर मैच देखना हमेशा मुश्किल रहा है, क्योंकि वास्तव में खेलना बहुत आसान है। यह ऊर्जा देखना, यह माहौल देखना, बस इसने मुझे रोमांच दे दिया। जब भी कोई विकेट गिर रहा था, जब भी कोई छक्का लग रहा था तो मैं झूम रही थी।
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स्मृति मंधाना
- फोटो : PTI
मंधाना ने खिताबी जीत को बताया जादुई
भारतीय महिला टीम की उपकप्तान स्मृति मंधाना से पूछा गया कि चैंपियन बनकर कैसा लग रहा है? इस पर मंधाना ने कहा, मुझे नहीं पता कि इस पर कैसी प्रतिक्रिया दूं। अभी भी सब कुछ समझ में आने में वक्त लग रहा है। यह वाकई अविश्वसनीय पल है। अपने घर में वर्ल्ड कप और फिर यह पढ़ना कि भारत चैंपियन है यह बहुत ही अवास्तविक सा लग रहा है। हर वर्ल्ड कप में हम जाते हैं और हम सबने कई बार निराशाएं झेली हैं। अगर वर्ल्ड कप जीतने के लिए मुझे हर रात 45 दिन तक जागना पड़े तो मैं वह भी स्वीकार कर लूंगी। पिछला टी20 विश्व कप हमारे लिए बहुत कठिन अनुभव था। तब हमने साफ तय किया था कि अपनी फिटनेस पर, अपने हर पहलू पर काम करना है। जिस तरह सभी ने मिलकर मेहनत की और खेला ऐसे वर्ल्ड कप में सब एक-दूसरे के साथ थे। मैं आपको बता नहीं सकती कि टीम का माहौल कैसा था। वह बस जादुई था।
भारतीय महिला टीम की उपकप्तान स्मृति मंधाना से पूछा गया कि चैंपियन बनकर कैसा लग रहा है? इस पर मंधाना ने कहा, मुझे नहीं पता कि इस पर कैसी प्रतिक्रिया दूं। अभी भी सब कुछ समझ में आने में वक्त लग रहा है। यह वाकई अविश्वसनीय पल है। अपने घर में वर्ल्ड कप और फिर यह पढ़ना कि भारत चैंपियन है यह बहुत ही अवास्तविक सा लग रहा है। हर वर्ल्ड कप में हम जाते हैं और हम सबने कई बार निराशाएं झेली हैं। अगर वर्ल्ड कप जीतने के लिए मुझे हर रात 45 दिन तक जागना पड़े तो मैं वह भी स्वीकार कर लूंगी। पिछला टी20 विश्व कप हमारे लिए बहुत कठिन अनुभव था। तब हमने साफ तय किया था कि अपनी फिटनेस पर, अपने हर पहलू पर काम करना है। जिस तरह सभी ने मिलकर मेहनत की और खेला ऐसे वर्ल्ड कप में सब एक-दूसरे के साथ थे। मैं आपको बता नहीं सकती कि टीम का माहौल कैसा था। वह बस जादुई था।