टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर ने क्रिकेट से संन्यास के बाद राजनीति में उतर गए हैं। लोकसभा चुनाव से पहले गंभीर ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। करीब एक दशक तक भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रहने वाले गंभीर का 2011 के वर्ल्ड कप में बड़ा योगदान रहा है। हालांकि इसके कुछ समय बाद ही उनके क्रिकेट करियर का ग्राफ काफी तेजी से नीचे आया।
खेल के मैदान पर उनके प्रदर्शन में कोई कमी देखने को नहीं मिलती, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक गंभीर का एटीट्यूट उनके डूबते करियर की सबसे बड़ी वजह रहा। मैदान पर साथी खिलाड़ियों संग बहस और अंपायर से दुश्मनी मोल लेने लेने की वजह से गंभीर को काफी नुकसान हुआ। आईपीएल और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच 2013 में खेला था और इसके बाद उनकी मैदान पर फिर कभी वापसी नहीं हुई।
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Manoj Tiwary-gautam gambhir
मनोज तिवारी की दी थी मारने की धमकी
2015 में गंभीर इस कदर आपा खो बैठे थे कि अपने हमवतन भारतीय खिलाड़ी मनोज तिवारी को मारने की धमकी तक दे डाली थी। दरअसल, दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर दिल्ली और बंगाल आमने-सामने थी। गंभीर दिल्ली की कप्तानी कर रहे थे तो बंगाल टीम के कप्तान मनोज तिवारी थे। किसी बात पर दोनों के बीच मतभेद इतने गहरे हो गए कि दोनों हाथा-पाई को उतारे हो गए थे।
विवाद के दौरान गौतम ने मनोज को धमकी देते हुए कहा था कि 'शाम को मिल तुझे मारूंगा'। इसके जबाव में मनोज ने कहा कि 'शाम क्या अभी बाहर चल '। मामला तब और भी गंभीर हो गया जब बीच बचाव के लिए आए अंपायर के श्रीनाथ को गौतम गंभीर ने धक्का दे दिया। जो उन्हें मनोज की तरफ बढ़ने से रोक रहे थे।
मैच के दौरान अंपायर को छूना एक गंभीर अपराध माना जाता है और ऐसा करके गौतम गंभीर ने अपने लिए मुसीबत बढ़ा ली। खबर है कि दोनों खिलाड़ियों को उनकी इस हरकत की वजह से मैच रेफरी ने समन भेजा है। माना जा रहा है कि यह झगड़ा दोना खिलाड़ियों को महंगा पड़ सकता है।