'क्रिकेट के भगवान' माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर ने भारतीय अंडर-19 टीम के लिए खेलते हुए इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया। 18 वर्षीय अर्जुन ने श्रीलंका के खिलाफ खेले पहले चार दिवसीय मैच में कुल दो विकेट लिए जबकि बल्लेबाजी के समय वह खाता भी नहीं खोल सके थे।
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सचिन तेंदुलकर
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उल्लेखनीय है कि अर्जुन के पिता महान सचिन तेंदुलकर का इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू भी चमकीला नहीं रहा था। सचिन ने 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट व वन-डे में डेब्यू किया था। 15 नवंबर 1989 को टेस्ट में डेब्यू करने वाले तेंदुलकर को पहली पारी में सिर्फ एक ओवर करने को मिला था, जिसमें उन्होंने 10 रन खर्च किए थे। वहीं 17 वर्षीय सचिन जब बल्लेबाजी करने उतरे तब वकार यूनिस ने उन्हें 15 रन के स्कोर पर आउट किया था।
दूसरी पारी में तेंदुलकर ने चार ओवर में 15 रन खर्च किए। मगर उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला और यह टेस्ट ड्रॉ हो गया था। सचिन तेंदुलकर का डेब्यू वन-डे तो और भी खराब रहा। अपने बेटे अर्जुन के जैसे ही मास्टर ब्लास्टर भी बिना खाता खोले आउट हो गए थे। सचिन ने पाकिस्तान के खिलाफ 18 दिसंबर 1989 को गुजरांवाला में वन-डे डेब्यू किया था। 88 रन का पीछा कर रही भारतीय टीम 16 ओवर में 80 रन पर ढेर हो गई थी।
तेंदुलकर को सिर्फ दो गेंद खेलने का मौका मिला था और एक बार फिर वकार यूनिस ने उन्हें अपना शिकार बनाया था। हालांकि, तेंदुलकर ने शुरुआती असफलता से अपने विश्वास को डगमगाने नहीं दिया और आगे चलकर वह क्रिकेट के सर्वकालिक महान बल्लेबाजों की श्रेणी में शामिल हुए। उन्होंने टेस्ट में 15, 921 रन जबकि वन-डे में 18,426 रन बनाए। तेंदुलकर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में शतकों का शतक जमाने वाले विश्व के एकमात्र बल्लेबाज हैं।
क्या हम उम्मीद कर सकते हैं कि अर्जुन तेंदुलकर का भविष्य भी अपने पिता के समान सफलता के शिखर पर पहुंचेगा क्योंकि उनके इंटरनेशनल क्रिकेट के करियर की शुरुआत में बहुत समानताएं हैं। अब इसका जवाब समय के साथ ही मिलेगा।