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भोरमदेव पदयात्रा: 17 किमी पैदल चलकर किया भगवान शिव का जलाभिषेक, कई IAS और IPS सहित 5000 श्रद्धालु हुए शामिल

Mon, 10 Jul 2023 01:31 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कबीरधाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कबीरधाम Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Mon, 10 Jul 2023 01:31 PM IST
सार

कबीरधाम स्थित भोरमदेव मंदिर के लिए एतिहासिक पदयात्रा सावन के पहले सोमवार को हुई। इस पदयात्रा में कई आईएएस, आईपीएस सहित 5000 श्रद्धालु शामिल हुए हैं। यह सभी लोग भोरमदेव मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया। 

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Bhoramdev Padyatra taken out from Budha Mahadev Temple on first Monday of Sawan in Kabirdham
भोरमदेप मंदिर पदयात्रा में शामिल श्रद्धालु। - फोटो : संवाद

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम स्थित भोरमदेव मंदिर के लिए एतिहासिक पदयात्रा सावन के पहले सोमवार को हुई। इस पदयात्रा में कई आईएएस, आईपीएस सहित 5000 श्रद्धालु शामिल हुए हैं। यह सभी लोग भोरमदेव मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया। पदयात्रा की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। बूढ़ा महादेव मंदिर से कलेक्टर जनमजेय महोबे ने सुबह करीब 8 बजे इस 17 किमी लंबी पदयात्रा की शुरुआत की। भोरमदेव मंदिर को छत्तीसगढ़ के खजुराहो के नाम से जाना जाता है। 

Bhoramdev Padyatra taken out from Budha Mahadev Temple on first Monday of Sawan in Kabirdham
भोरमदेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़। - फोटो : संवाद

जलाभिषेक के बाद किया जाएगा पौधरोपण
सदियों से चली आ रही यह पदयात्रा प्रशासनिक तौर पर आमजनों के सहयोग से 2008 से अनवरत जारी है। इस बार वन विभाग की ओर से पदयात्रा के दौरान ग्राम छपरी (गौशाला) और भोरमदेव मंदिर परिसर के अंदर पौधरोपण कराया जाएगा। वहीं श्रद्धालुओं एवं पदयात्रियों के जन स्वास्थ्य सुविधा एवं विश्राम के लिए व्यवस्था जिला प्रशासन ने की है। बाहर से आने वाले पदयात्रियों के लिए रोड मैप भी तैयार किया गया है। स्वास्थ्य विभाग का चलित एम्बुलेंस साथ है और श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था है। 

Bhoramdev Padyatra taken out from Budha Mahadev Temple on first Monday of Sawan in Kabirdham
यात्रा में कलेक्टर और एसपी सहित जिले में पहले तैनात रहे अफसर भी शामिल हुए। - फोटो : संवाद

यात्रियों के रुकने और नाश्ते की व्यवस्था
पदयात्रा मार्ग में प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न स्थानों पर शीतल पेयजल और नाश्ता की व्यवस्था की गई है। इनमें सकरी नदी विद्युत केन्द्र के पास, ग्राम समनापुर, ग्राम बरपेलाटोला, ग्राम रेंगाखारखुर्द, ग्राम कोडार, ग्राम राजानवागांव, ग्राम बाघुटोला, ग्राम छपरी (गौशाला) और भोरमदेव मंदिर परिसर शामिल है। वहीं भोरमदेव मंदिर परिसर के आस-पास कांवरियों के ठहरने के लिए भवन की व्यवस्था भी है। कंवरिया भवन, ग्राम पंचायत के पास बैगा भवन, आदिवासी भवन, शांकम्भरी भवन, ग्राम पंचायत भवन में वाटर प्रुफ टेंट,  मड़वा महल मोड़ के पास धर्मशाला भवन में रुक सकते हैं।

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Bhoramdev Padyatra taken out from Budha Mahadev Temple on first Monday of Sawan in Kabirdham
भोरमदेव मंदिर, कबीरधाम। - फोटो : संवाद

प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध
भोरमदेव मंदिर के आस-पास पॉलीथिन एवं प्लास्टिक युक्त सामग्री का उपयोग नहीं करने की अपील की गई है। कंवरिया और श्रद्धालुओं से प्लास्टिक, चावल, फूल किसी भी मुर्ति पर नहीं डालने को कहा गया है। आने वाले कंवरियों एवं श्रद्धालुओं के लिए अस्थाई शौचालय का निर्माण किया गया है। बैनर पोस्टर से चिन्हांकित किया गया है। सभी श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि सभी जगह स्वच्छता से उपयोग करें ताकि गंदगी एवं पर्यावरण प्रदूषण को रोका जा सके। 

हेल्प लाइन नंबर किया गया जारी
स्थल में अप्रिय घटना और बच्चों का गुम हो जाने पर मंदिर प्रांगण में पूछताछ केन्द्र की स्थापना की गई है। इसके लिए हेल्प लाइन नंबर जारी किया गया है।

एस.डी.एम. बोड़ला -  75877 05154
तहसीलदार बोड़ला - 9165961970
ना.तहसीलदार बोड़ला - 98937 10385
थाना प्रभारी भोरमदेव - 94242 95795
(पुलिस वाहन) - 112
पटवारी - 91310 11498

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Bhoramdev Padyatra taken out from Budha Mahadev Temple on first Monday of Sawan in Kabirdham
भोरमदेव मंदिर - फोटो : सोशल मीडिया

एक हजार साल पुराना है भोरमदेव मंदिर
कबीरधाम जिले में मैकल पर्वत समूह से घिरा भोरमदेव मंदिर करीब एक हजार साल पुराना है। मंदिर की बनावट खजुराहो और कोणार्क के मंदिर के समान है। यहां मुख्य मंदिर की बाहरी दीवारों पर मिथुन मूर्तियां बनी हुई हैं, इसलिए इसे छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाता है। मंदिर को 11वीं शताब्दी में नागवंशी राजा गोपाल देव ने बनवाया था। ऐसा कहा जाता है कि गोड राजाओं के देवता भोरमदेव थे और वे भगवान शिव के उपासक थे। शिवजी का ही एक नाम भोरमदेव है। इसके कारण मंदिर का नाम भोरमदेव पड़ा।

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