वैसे तो जनता के लिए कई सरकारी योजनाएं उपलब्ध हैं। लेकिन इन योजनाओं में से एक स्कीम ऐसी भी है जिससे करदाताओं का काफी लाभ मिल रहा है। कानूनी विवादों में फंसे लाखों कर मामलों से न सिर्फ करदाता वर्षों से मानसिक तनाव झेल रहे, बल्कि सरकार का भी करोड़ों रुपये का राजस्व फंसा हुआ है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश करते हुए प्रत्यक्ष कर से जुड़े पुराने कानूनी मामलों को सुलझाने के लिए 'विवाद से विश्वास' योजना की घोषणा की थी। विवाद से विश्वास योजना के तहत 97,000 करोड़ रुपये के विवादित कर मामलों के निपटान की पेशकश की गई है। सूत्रों ने कहा कि अब तक काफी समय से लंबित कुल मामलों में से 24.5 फीसदी विवादित मामलों को निपटान के लिए इसके तहत लाया गया है।
बेहद काम की है ये सरकारी योजना, 97 हजार करोड़ के विवादित कर मामलों के निपटान की पेशकश
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राजस्व विभाग के सूत्रों के अनुसार अब तक 1,25,144 मामलों को विवाद से विश्वास योजना के अंतर्गत लाया गया है। यह कुल 5,10,491 विवादित मामलों का 24.5 फीसदी है। ये मामले विभिन्न अदालतों, मंचों पर लंबित थे। उसने कहा, 'योजना को लेकर जो लोगों की प्रतिक्रिया है, वह काफी उत्साहजनक है। अब तक 97,000 करोड़ रुपये से अधिक के विवादित मामलों को निपटान के लिए लाया गया है।'
28 फरवरी है समयसीमा
विवाद से विश्वास योजना के तहत घोषणा करने की समयसीमा बढ़ाकर 28 फरवरी कर दी गई है। वहीं विवादित कर भुगतान की तारीख 31 मार्च है। प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास कानून, 2020 को 17 मार्च 2020 को प्रभाव में आया। इसका मकसद विभिन्न अपीलीय मंचों पर लंबित प्रत्यक्ष कर विवादों का समाधान करना है। इसके तहत विवादित कर का 100 फीसदी तथा विवादित जुर्माना या ब्याज अथवा शुल्क का 25 फीसदी देकर मामले का निपटान किया जा सकता है।
करदाताओं को मिलती है ब्याज और जुर्माने पर छूट
इस योजना का मकसद लंबित कर विवादों का समाधान करना है। इस योजना के तहत करदाताओं को केवल विवादित टैक्स राशि का भुगतान करना होता है। उन्हें ब्याज और जुर्माने पर पूरी छूट मिलती है। सरकार ने योजना में स्पष्ट किया था कि जिस आय का खुलासा नहीं किया गया अथवा जो संपत्ति भारत से बाहर स्थित है, उन पर चल रहे कर विवादों में इससे कोई राहत नहीं मिलेगी। इसके अलावा जिन मामलों में किसी निश्चित आकलन वर्ष के लिए फोरम या कोर्ट पहले ही फैसला सुना चुका है। उन्हें भी योजना का लाभ नहीं दिया जा सकेगा। साथ ही जिन लोगों के खिलाफ स्मगलिंग जैसे मामलों में हिरासत या गिरफ्तारी के आदेश जारी हो चुके हैं अथवा बेनामी संपत्ति के हस्तांतरण, धनशोधन, ड्रग्स या गैरकानूनी मामलों में कोई आदेश जारी किया गया है, उन्हें भी योजना के तहत शामिल नहीं किया जाएगा।
ऐसे होगा पूरा काम
- करदाता विवाद से विश्वास डेक्लेरेशन फॉर्म में सभी जरूरी जानकारियां भरकर फोरम में जमा कराएं।
- आयकर विभाग की ओर से 15 दिनों के भीतर प्रमाण पत्र जारी हो जाएगा, जिसमें योजना के तहत कुल देय राशि का खुलासा होगा।
- करदाता को भुगतान किए जाने से संबंधित एक आदेश जारी कर दिया जाएगा।
- यह आदेश पूरी तरह निर्णात्मक होगा और इसे देश या विदेश की किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।