कई बार ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है कि निवेशक को पॉलिसी बंद करने के बारे में सोचना पड़ता है। इसका कारण कुछ भी हो सकता है, जैसे किसी अन्य पॉलिसी में रुची या फिर प्रीमियम भरने में परेशानी होना। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एलआईसी पॉलिसी को बंद कराते समय कई तरह के नियमों का सामना करना होता है? दरअसल, पॉलिसी बंद कराने पर निवेशक को कुछ पैसे मिलते हैं जिसे सरेंडर वैल्यू कहा जाता है। अपनी पॉलिसी बंद कराने से पहले आपके लिए कुछ बातें जानना बेहद जरूरी है। क्या आप जानते हैं कि पॉलिसी बंद करने पर मिलने वाली सरेंडर वैल्यू भी टैक्स के दायरे में आती है? क्या सरेंडर वैल्यू का जिक्र आईटीआर भरते समय किया जा सकता हैं? या फिर, क्या सरेंडर वैल्यू के हिसाब से इनकम टैक्स निवेशक से कर वसूल सकता है? हालांकि, एलआईसी जीवन बीमा पॉलिसी इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत कर में छूट का लाभ देता है। साथ ही यदि आपने 31 मार्च 2003 से पहले पॉलिसी ली है तो आपके चुकाए गए प्रीमियम पर 20 फीसदी तक का कर छूट मिल सकता है। तो चलिए जानते हैं इस बारे में...
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LIC: मैच्योरिटी से पहले कराना चाहते हैं पॉलिसी बंद, तो जान लें ये नियम, चुकाना पड़ सकता है टैक्स
Wed, 15 Dec 2021 02:19 PM IST
ज्योति मेहरा
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Wed, 15 Dec 2021 02:19 PM IST
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मैच्योरिटी से पहले कराना चाहते हैं पॉलिसी बंद, तो जान लें ये नियम (प्रतिकात्मक फोटो)
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कम देना होगा टैक्स
- पॉलिसी सरेंडर करने से पहले आपको सारे नियमों की जानकारी होनी बेहद जरूरी है। अमूमन पॉलिसीस पर नियम होता है कि यदि शुरू के दो साल में प्रीमियम पूरा भरा गया है तो सरेंडर वैल्यू पर किसी भी प्रकार का कोई टैक्स नहीं लगता।
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- अगर पॉलिसी 31 मार्च 2012 से पहले ली गई है, तो भी इसपर कोई टैक्स नहीं होगा। जबकि यदि पॉलिसी 1 अप्रैल 2003 से 31 मार्च 2012 के बीच ली गई है, तो टैक्स पर तब ही छूट मिलेगी जब सम एस्योर्ड की राशि सालाना प्रीमियम से 5 गुना अधिक होगी।
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- इसी क्रम में यदि आपने पॉलिसी 1 अप्रैल 2012 के बाद ली है तो इसपर टैक्स तब माफ होगा जब सम एस्योर्ड की राशि प्लान के सालाना प्रीमियम से 10 गुना ज्यादा हो।
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- वहीं 1 अप्रैल 2003 से 31 मार्च 2012 के बीच ली गई पॉलिसी में किसी भी एक साल में चुकाई गई प्रीमियम की राशि सम एस्योर्ड के 20% से अधिक है तो आपको सरेंडर वैल्यू पर टैक्स देना ही होगा।