भारत सरकार अपने शीतकालीन सत्र में क्रिप्टोकरेंसी के रेगुलेशन को लेकर बिल लाने जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि सरकार द्वारा प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी को बैन किया जा सकता है। हालांकि इस बात को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है। कोरोना काल के बाद भारत में क्रिप्टो करेंसी में इन्वेस्टिंग को लेकर क्रेज काफी बढ़ा है। बीते एक साल के डाटा को देखें तो क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट में भारत के निवेशकों की संख्या में एक एक्सपोनेंशियल ग्रोथ देखने को मिली है। ऐसे में निवेश के इस नए मंच को लेकर विश्व भर में कई सवाल खड़े हुए हैं। कई लोग इसे जुआ बता रहे हैं, तो कई इसे भविष्य की मुद्रा। हालांकि इसको लेकर लोगों के अपने तर्क और अपने जवाब हैं। क्रिप्टों में निवेश करना कितना जायज है और कितना नहीं इसे लेकर कई लोगों की अलग अलग राय है। कई विशेषज्ञों द्वारा क्रिप्टो निवेश को काफी खतरनाक बताया जा रहा है। आज हम इसी के बारे में जानेंगे।
Cryptocurrency Bill 2021: जानें क्यों खतरनाक है क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करना? यहां समझें आसान भाषा में
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अमीर व्यक्ति और संस्थाओं का प्रभुत्व
क्रिप्टोकरेंसी एक विकेंद्रित मुद्रा है। इस कारण क्रिप्टो पर किसी राज्य का नियंत्रण नहीं रहता है। ये चीज क्रिप्टो को भले ही खास बनाती है। पर गौर करने वाली बात ये है कि क्रिप्टो करेंसी बाजार पर अमीर लोगों और कुछ संस्थाओं का प्रभुत्व रहता है। वे अपने इंटरेस्ट के मुताबिक बाजार को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने का काम करते हैं।
आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग और गैर कानूनी चीजों की तस्करी
डार्क वेब मार्केट में ड्रग्स, हथियारों की खरीदारी और भी कई गैर कानूनी चीजों के व्यापार के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जाता है। क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और एक्सटोर्शन के लिए भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।
पर्यावरण के लिए विनाशक
बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग में भारी मात्रा में इलेक्ट्रिसिटी का उपयोग होता है। एक रिपोर्ट की मानें तो अकेले बिटकॉइन क्रिप्टो की माइनिंग में जितनी इलेक्ट्रिसिटी का उपयोग होता है, उसकी मात्रा अर्जेंटीना देश के बराबर है। क्रिप्टो माइनिंग से पर्यावरण के ऊपर बुरा असर पड़ रहा है।