प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के किसानों का आय को दोगुना करने के लिए कई तरह की स्कीम चलाई हुई है, इनमें से एक स्कीम है कुसुम। कुसुम स्कीम के तहत किसान की बंजर जमीन पर सोलर पैनल लगाकर किसान की अतिरिक्त कमाई कराई जाती है।
मोदी सरकार की इस स्कीम से किसानों की होती है अतिरिक्त आमदनी, जानिए स्कीम के फायदे
किसानों की मदद करने के लिए मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना कुसुम का लाभ उठाने के लिए किसान को बस थोड़ी राशि देनी होती है। अपनी जमीन पर सौर ऊर्जा उपकरण लगाने के लिए किसान को दस फीसदी रकम का भुगतान करना होता है। केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी की रकम किसानों को सीधा उनके खाते में मिलेगी।
केंद्र सरकार की ओर से साफ तौर पर कहा गया है कि किसान अपनी बंजर जमीन पर ही सोलर पैनल लगवा सकता है। इस योजना के तहत बैंक किसानों को 30 फीसदी राशि कर्ज के रूप में देंगे और सरकार किसानों को सब्सिडी के रूप में सोलर पंप की लागत का कुल 60 फीसदी हिस्सा देगी।
https://mnre.gov.in/# पर जाकर केंद्र सरकार की इस स्कीम के बारे में विस्तृत जानकारी ले सकते हैं।
केंद्र सरकार की इस स्कीम से किसानों को दो तरह से फायदे होंगे, पहला तो ये कि अपनी जमीन पर सोलर पैनल लगवाने से मुफ्त में बिजली मिलेगी और दूसरा ये कि अतिरिक्त बिजली की सप्लाई कर किसान अतिरिक्त कमाई कर सकता है। स्कीम के तहत केवल बंजीर जमीन पर ही सोलर पैनल लगेंगे, इसलिए किसानों को बंजर जमीन से भी फायदा मिलेगा।
किसानों को मिलेगा फायदा
देश में किसानों को खेती की सिंचाई के लिए कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कभी तेज बारिश या कम बारिश या ओलावृष्टि से किसानों के खड़ी खेती खराब हो जाती है। ऐसे में कुसुम योजना के तहत सोलर पैनल लगाकर किसान अपनी खेती की सिंचाई आसानी से कर सकते हैं।
बंजर जमीन पर सोलर पैनल लगाकर बंजर जमीन से भी कमाई की जा सकती है, इससे किसान को अतिरिक्त कमाई का भी साधन मिल जाएगा।
कुसुम योजना के तहत साल 2022 तक देश में तीन करोड़ सिंचाई पंप को बिजली या डीजल की जगह सौर ऊर्जा से चलाने की कोशिश की जा रही है। कुसुम योजना पर कुल 1.40 लाख करोड़ रुपये की लागत आएगी।
कुसुम योजना के तहत होने वाले खर्च का वहन केंद्र और राज्य सरकार दोनों करेंगी। इस योजना के तहत 48,000 करोड़ रुपये का योगदान केंद्र सरकार कर सकती है और इतनी ही राशि राज्य सरकार की ओर से दी जाएगी। किसान को बस अपनी जमीन पर पंप लगवाने के लिए दस फीसदी राशि का भुगतान करना होगा।
कुसुम योजना के पहले चरण के तहत किसानों के उन सिंचाई पंपों का इस्तेमाल किया जाएगा जो डीजल से चल रहे हैं। एक सरकारी अनुमान के मुताबिक इस तरह के 17.5 लाख सिंचाई पंप सौर ऊर्जा से चलाए जाएंगे। इससे डीजल की खपत और कच्चे तेल के आयात पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।