जिंदगी के अंत को लेकर लोगों के मन में जिज्ञासा रहती है कि मरने के बाद किया होगा। मौत हर इंसान की जिंदगी का सच है और लोग मरने से भी डरते हैं। तमाम वैज्ञानिक और तकनीक के विकास के बाद भी आजतक मौत का रहस्य नहीं सुलझ पाया है।
'मैं न तो ठंडा था और न गर्म' क्या वो मौत का आगोश था?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्या है मौत के बाद, मौत के मुंह से लौटे इन लोगोंं ने बताया
पांच साल पहले एक व्यक्ति की ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई थी। उसे मृत घोषित कर दिया गया लेकिन कुछ मिनट बाद वह जिंदा हो गया। उसने बताया आंखें बंद होने के बाद जब मेरी आंख एक स्पेस जैसी जगह में खुली वहां पर न तो तारे थे और न ही रोशनी।
मैं न तो गर्म था और न ही ठंडा। थकान और भूख भी नहीं लग रही थी। वहां काफी शांति थी, मुझे पता था कि पास में रोशनी है मगर मैं जाने नहीं पा रहा था। मैं अपनी जिंदगी के बारे में सोचने लगा यह कोई मोंटाज नहीं था। मुझे लगा मैं आलस्य में किताब उलट-पलट रहा हूं और टुकड़े यहां वहां पड़े हैं।
उन्होंने कहा यह जो कुछ भी मेरे साथ हुआ इससे मेरा नजरिया कुछ चीजों के प्रति बिलकुल बदल गया। मुझे अभी भी मरने से डर लगता है लेकिन अब मैं इस बारे में चिंता नहीं करता कि मरने के बाद क्या होगा।'
क्या है मौत के बाद, मौत के मुंह से लौटे इन लोगोंं ने बताया
एक व्यक्ति मोटरसाइकल से गिर गया उसे जब अस्पताल लाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। पर बाद में जब वह जिंदा हुआ तो उसने बताया सड़क किनारे जब एम्बुलेंस के आने से पहले गिरा हुआ था तो एक व्यक्ति उसे बुला रहा था। उन्होंने बताया थोड़ी देर में सब काला हो गया और शांति हर जगह थी।
मुझे किसी के चिल्लाने की आवाज आ रही थी। जब मेरे मरने के बाद आंख खुली तो मैने देखा मेरा भाई मेरे बराबर में उकडूं बैठा है यह मेरे लिए अजीब था क्योंकि मेरे भाई की कई सालों पहले मौत हो चुकी है। काश में आपको और बातें बता सकता लकिन मुझे इससे ज्यादा कुछ याद नहीं आ रहा है। एक्सीडेंट की वजह से मेरी याददाश्त भी कमजोर हो गई है।
क्या है मौत के बाद, मौत के मुंह से लौटे इन लोगोंं ने बताया
एक व्यक्ति ने जिंदा होने के बाद बताया उसे ऐसा लगा रहा था जेसे कोई उसे धीरे-धीरे सोख रहा है। जैसे कोई पानी खींच रहा हो। एक समय तो ऐसा आया मैं गार्डन में था। यहां फूल नहीं थे सिर्फ धूल थी और विचित्र घास थी।
एक प्लेग्राउंड भी था और दो बच्चे इसमें दौड़ रहे थे। इस अहसास को व्यक्त करना मुश्किल है लेकिन मुझे पता नहीं था कि मैं यहां रहना चाहती हूं या नहीं।लेकिन मैं वापस आने के प्रयास करती रही। यह सब अहसास मुझे तब हुआ जब मेरा दिल 6 मिनट के लिए धड़कना बंद हो गया था।
क्या है मौत के बाद, मौत के मुंह से लौटे इन लोगोंं ने बताया
एक टीनेजर की कई महीनों से कैमोथेरेपी चल रही थी और एक दिन अचानक उसकी नाक से अनियंत्रित खून बहने लगा। इसके बाद उस किशोर को मेडिकली मृत घोषित कर दिया गया। उसने बताया मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने आपकी अलार्म घड़ी पर हाथ रखकर बंद कर दिया हो। मुझे इसके बाद ऐसा लगा जैसे नींद में हम झपकी लेते हैं और जाद जाते हैं यह बहुत ही खूबसूरत अहसास था।