आज भी दुनिया में ऐसे कई समुदाय् हैं जो सालों पुरानी परम्पराओं को जिंदा रखती हैं। ऐसा ही एक समुदाय है पश्चिमी मंगोलिया के कजाक लोगों का। ये आज भी अपनी 4,000 साल पुरानी परम्परा को उतने ही जोश से निभाते हैं। ये है हर साल होने वाला गोल्डन ईगल फेस्टीवल यानी सुनहरे बाज का पर्व।
4000 साल पुरानी है बाज शिकार की प्रथा
इस पर्व में ये लोग अपने बाज के जरिए लोमड़ी, बकरियों का शिकार करते हैं। इस दौरान ये बाज हवा में 321 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से उड़ते हैं और शिकार करते हैं। साथ ही घुड़दौड़ और तीरंदाजी भी होती है। इसके अलावा लोग अपने घोड़ों पर बैठ कर बकरी की खाल हथियाने के लिए भी लड़ाई करते हैं।
4000 साल पुरानी है बाज शिकार की प्रथा
इन तस्वीरों में इन लोगों ने जो पारंपरिक कपड़े पहने हैं वो उन्हीं लोमड़ी, बकरियों, भेड़िए की खाल से बने हैं जो इनके बाजों ने इनके लिए शिकार किए होते हैं।
4000 साल पुरानी है बाज शिकार की प्रथा
ये तस्वीरें सिडनी के फोटोग्राफर मसीमो रूमी ने खुद वहां जाकर ली हैं। वे बताते हैं,'' पश्चिमी मंगोलिया के ऐल्टाई पहाड़ों में रहने वाले कजाकी लोग ही इकलौते ऐसे हैं जो सुनहरे बाजों से शिकार करते हैं।'' ये प्रथा 940 ईसापूर्व में उत्तर चीन में रहने वाले मंचूरिया के बंजारे खितानों द्वारा शुरू की गई थी।
4000 साल पुरानी है बाज शिकार की प्रथा
मसीमो ने बताया कि कजाकियों को अपनी ट्रेनिंग खत्म करने में पांच साल लग जाते हैं। इस दौरान बाज को पूरी इज्जत औऱ प्यार के साथ रखा जाता है वरना वे उड़ जाते हैं। उन्हें ट्रेनिंग देने वाले इनके मालिक लगातार उनके लिए गाने गाते हैं औऱ बात करते हैं ताकि उनकी आवाज बाजों को याद हो जाए।