दुनिया में ठगों की कोई कमी नहीं है। एक से बढ़कर ठग होते हैं, जो दुनिया को अपने दिमाग से चूना लगाते हैं। कुछ तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने खुद की प्रॉपर्टी बताकर सरकारी इमारतों तक को बेच दिया। इन ठगों ने अमेरिका के प्रसिद्ध 'स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी', ताजमहल और लालकिले तक को नहीं छोड़ा। उन्होंने इन ऐतिहासिक इमारतों को भी अपने 'हुनर' से बेच दिया। हम ऐसे ही दुनिया के कुछ ऐसे ठगों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी चिपड़ी-चुपड़ी बातों से लोगों को करोड़ों-अरबों का चूना लगाया। इनमें कुछ भारतीय भी शामिल हैं।
अमेरिका का रहने वाला फ्रेंक एबग्नेल एक ऐसा ठग था, जिसने बैंक के चेकों में हेराफेरी कर कई लोगों को अपना शिकार बनाया और उनसे करोड़ों रुपये ऐंठे। कहा जाता है कि फ्रेंक किसी की भी हूबहू सिग्नेचर कर सकता था। उसने अपने इसी काबिलियत का फायदा उठाते हुए दुनिया के कुल 26 देशों में लोगों को ठगा और बैंकों को भी अपना शिकार बनाया। हालांकि बाद में उसे पकड़ लिया गया और जेल में बंद कर दिया गया।
चार्ल्स पोंजी मूलरूप से इटली का रहने वाला था, लेकिन उसने अपनी पूरी जिंदगी अमेरिका और कनाडा के लोगों को ठगा। उसने दुनियाभर के निवेशकों को इनवेस्टमेंट स्कीम के नाम पर चूना लगाया। कहा जाता है कि चार्ल्स पोंजी के नाम पर ही लोगों को ठगने वाली इनवेस्टमेंट स्कीम का नाम पोंजी स्कीम पड़ा। उसने एक ही दिन में 20 लाख डॉलर की ठगी की थी। ये एक रिकॉर्ड ही है। चार्ल्स कई बार पुलिस की पकड़ में भी आया, लेकिन वो हर बार किसी न किसी तरह जल्दी छूट जाता था।
जॉर्ज सी पार्कर दुनिया के मशहूर ठगों में से एक था। उसने अमेरिका की कई सरकारी इमारतों तक को बेच दिया था। कहा जाता है कि उसने स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी, ग्रांट का मकबरा, मेडिसन स्क्वॉयर गार्डन, ब्रुकलिन ब्रिज और मेट्रोपॉलिटन ऑर्ट म्यूजियम तक को लोगों को बेच दिया था। वो हर बार पुलिस को चकमा देकर भाग जाता था, लेकिन बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। हालांकि बाद में जेल में ही उसकी मौत हो गई।
नटवरलाल यानी मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव को भारत का सबसे बड़ा ठग माना जाता है। उसने लोगों को ऐसा बेवकूफ बनाया था कि उन्हें ताजमहल, संसद भवन और लालकिले तक को बेच दिया था और उनसे करोड़ों रुपये ऐंठे थे। वो कई बार गिरफ्तार भी हुआ, लेकिन हर बार वो पुलिस को चकमा देकर भाग जाता था। आखिरी बार उसे 1996 में देखा गया था, लेकिन उसके बाद वो कहां चला गया, किसी को नहीं पता।