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13 बरसों से शीशे के चेंबर में कैद है ये महिला, इस मां की दर्दभरी कहानी जानकर सिहर उठता है मन
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 02 Apr 2018 08:54 AM IST
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Isolated Juana Munoz
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इस महिला को तस्वीर में हंसते हुए देखकर आपको लग रहा होगा कि अच्छी-खासी तो जिंदगी जी रही है, भला और क्या चाहिए... लेकिन जब आप इसकी कहानी जानेंगे तो मन सिहर उठेगा।
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जी हां, इस महिला को देखकर तो कोई भी यह अंदाजा नहीं लगा पाएगा कि यह रहस्यमयी बीमारियों से ग्रसित है। इस महिला को ये जानलेवा बीमारियां कैसे लगी खुद डॉक्टर्स के लिए आज तक यह बड़ी पहेली बनी है।
महिला को हुई इन घातक बीमारियों का मूल कारण उन्हें आज तक नहीं पता चल पाया है। बता दें महिला को चार भयानक बीमारियां हैं। इस वजह से वह 25 मीटर लंबे शीशे के चेंबर में रहने को मजबूर हैं। पिछले 1 दशक से भी लंबे समय से यही उनका घर बन गया है।
महिला को हुई इन घातक बीमारियों का मूल कारण उन्हें आज तक नहीं पता चल पाया है। बता दें महिला को चार भयानक बीमारियां हैं। इस वजह से वह 25 मीटर लंबे शीशे के चेंबर में रहने को मजबूर हैं। पिछले 1 दशक से भी लंबे समय से यही उनका घर बन गया है।
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मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक स्पेन के केडिज की रहने वाली 53 वर्षीय जुआना मुनोज की जिंदगी इस शीशे के चारदीवारी में कैद है। अगर जुआना को इस शीशे के कमरे से बाहर लाया जाता है तो कंडीशन और ज्यादा बुरी हो सकती है।
जुआना को आइसोलेट(अलग) रखने का सबसे बड़ा कारण यही है कि डॉक्टर्स को लगता है कि अन्य लोगों के सम्पर्क में आने से उसकी यह बीमारी और लोगों में भी फैल सकती है। उन्हें कैमिकल सेंसिटिविटी, फाइब्रोमायलजिया, क्रोनिक फटीग सिंड्रोम और इलेक्ट्रोसेंसिटिविटी जैसी घातक बीमारियां हैं।
जुआना को आइसोलेट(अलग) रखने का सबसे बड़ा कारण यही है कि डॉक्टर्स को लगता है कि अन्य लोगों के सम्पर्क में आने से उसकी यह बीमारी और लोगों में भी फैल सकती है। उन्हें कैमिकल सेंसिटिविटी, फाइब्रोमायलजिया, क्रोनिक फटीग सिंड्रोम और इलेक्ट्रोसेंसिटिविटी जैसी घातक बीमारियां हैं।
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इसलिए जुआना अपनी फैमिली के बीच रहते हुए भी उनके साथ नहीं है। वह अपने पति और बच्चों पर प्यार नहीं लुटा सकती, उन्हें छू नहीं सकती। यही उनके जीवन का सबसे बड़ा दर्द बन गया है।
हाल ही में उनके घर एक नन्हा मेहमान (उनका पोता) आया तो जुआना का मन उसे गोद में उठाकर झूमने का हुआ मगर अफसोस वह उसे अपनी गोद में नहीं उठा सकती थी। इस मौके पर सबकी आंखें भर आई। आज इतने बरस बीत जाने के बाद भी जुआना को उस दिन का इंतजार है, जब वह अपने परिवार के बीच सबसे घुल मिल पाएंगी और उन पर अपना प्यार न्यौछावर कर पाएंगी।
हाल ही में उनके घर एक नन्हा मेहमान (उनका पोता) आया तो जुआना का मन उसे गोद में उठाकर झूमने का हुआ मगर अफसोस वह उसे अपनी गोद में नहीं उठा सकती थी। इस मौके पर सबकी आंखें भर आई। आज इतने बरस बीत जाने के बाद भी जुआना को उस दिन का इंतजार है, जब वह अपने परिवार के बीच सबसे घुल मिल पाएंगी और उन पर अपना प्यार न्यौछावर कर पाएंगी।
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13 साल पहले ऐसे लगा था जुआना को रोग
जुआना को 13 साल पहले यह घातक बीमारियां तब हुई जब वह अपने पहले बच्चे को जन्म देने के बाद अपने पति के उगाए आलुओं को साफ कर रही थी। उस समय आलू पर लगी धूल उनकी आंख में चली गई और उन्हें बुरी तरह जलन होने लगी। इसके बाद ही स्थिति बिगड़ी और इतनी बिगड़ती चली गई कि उनका यह हाल हो गया। काफी ट्रीटमेंट के बाद भी उन्हें आराम नहीं मिला उल्टा उनकी परेशानी बढ़ने लगी।
जब डॉक्टर्स को यह पता लगा कि उन्हें चार-चार घातक बीमारियां हैं तब उन्होंने जुआना के पति को यह बात बताई और साथ में उन्हें फैमिली से अलग रखे जाने की सलाह दी। जुआना को भी समझ आ चुका था कि वह अपने परिवार के बीच वैसे नहीं रह पाएंगी जैसे कि वह रहती थी। इसलिए वह अपने परिवार की सुरक्षा के लिए शीरे के चेंबर में रहने को तैयार हो गई। इस स्टोरी ने आज एक बार फिर यह साबित कर दिया कि एक मां ही अपने परिवार के लिए इतना बड़ा त्याग कर सकती है।
जुआना को 13 साल पहले यह घातक बीमारियां तब हुई जब वह अपने पहले बच्चे को जन्म देने के बाद अपने पति के उगाए आलुओं को साफ कर रही थी। उस समय आलू पर लगी धूल उनकी आंख में चली गई और उन्हें बुरी तरह जलन होने लगी। इसके बाद ही स्थिति बिगड़ी और इतनी बिगड़ती चली गई कि उनका यह हाल हो गया। काफी ट्रीटमेंट के बाद भी उन्हें आराम नहीं मिला उल्टा उनकी परेशानी बढ़ने लगी।
जब डॉक्टर्स को यह पता लगा कि उन्हें चार-चार घातक बीमारियां हैं तब उन्होंने जुआना के पति को यह बात बताई और साथ में उन्हें फैमिली से अलग रखे जाने की सलाह दी। जुआना को भी समझ आ चुका था कि वह अपने परिवार के बीच वैसे नहीं रह पाएंगी जैसे कि वह रहती थी। इसलिए वह अपने परिवार की सुरक्षा के लिए शीरे के चेंबर में रहने को तैयार हो गई। इस स्टोरी ने आज एक बार फिर यह साबित कर दिया कि एक मां ही अपने परिवार के लिए इतना बड़ा त्याग कर सकती है।