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1000 साल बाद सोने की मूर्ति से निकला यह इंसान, इसके आगे की कहानी जान सन्न रह गए लोग...
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 23 May 2018 10:22 AM IST
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नीदरलैंड्स के एक आर्ट मार्केट में चीन के मंदिर से सोने की मूर्ति लाई गई। मूर्ति ध्यान में लीन एक बौध संन्यासी की थी। हालांकि, यह किसी को नहीं पता था कि मूर्ति एशिया से यूरोप कब और कैसे लाई गई। करीब 1000 साल पुरानी यह मूर्ति सोने से बनी थी। एंटीक चीजों को पसंद करने वाले कला प्रेमियों के लिए यह बेशकीमती थी। विशेषज्ञों ने जब उसे करीब से देखा, तो उन्हें कुछ खटका। उन्होंने फौरन इस पर शोध शुरू किया। रिसर्च के शुरुआत में भी शोधकर्ताओं की नजर ऐसी चीज पर पड़ी कि उन्हें अपनी ही आंखों पर भरोसा ना रहा...
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इटली, जर्मनी और नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने मिलकर शोध शुरू किया। इस मूर्ति का सीटी स्कैन किया गया। जांच के दौरान पाया गया कि वह कोई मामूली मूर्ति नहीं थी। उसके अंदर एक मानव शरीर था। दरअसल, वह एक बौध भिक्षु की प्रिजर्व की गई बॉडी थी।
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वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि मूर्ति के अंदर जिस शख्स का शरीर था उसकी उम्र 30 से 50 साल के बीच रही होगी। मानव शरीर की चमड़ी और मांसपेशियां भी सुरक्षित थीं। एंडोस्कोप के जरिए शरीर के अंदर से सैंपल लिए गए तो पाया गया कि उस बौध भिक्षु के सारे अंग निकाल दिए गए थे और उनकी जगह कागज ठूंसा गया था।
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दरअसल, मूर्ति के अंदर मौजूद बौध भिक्षु ने करीब 1200 साल पहले खुद को एक गुफा में कैद कर लिया था। फिर प्राणायाम अवस्था में वह ध्यान में लीन हो गए। यह घटना करीब 14वीं शताब्दी की है। इतिहासकारों का मानना है कि संन्यासी की मौत के बाद चीन के मंदिर में उनकी पूजा होने लगी। इसके करीब 200 साल बाद उनके अनुयायियों ने उनके शरीर को सुरक्षित रखने के लिए सारे अंग निकाल दिए और शरीर को ममी बनाकर उस पर सोने की परत चढ़ा दी गई।
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हजारों साल पहले जापान, थाईलैंड और चीन में बौध संन्यासी समाधी लेते थे। यह मूर्ति बौध भिक्षु Liuquan की ममी है। वर्तमान में इसे बुडापेस्ट के नैचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में रखा गया है।