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अपने बेटे के इलाज के लिए इस मां ने किया ऐसा कुछ, जान लेंगे तो आंखों से छलक पड़ेंगे आंसू
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 13 Aug 2018 10:13 AM IST
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ये कहानी है एक ऐसी मां की जिसने अपने जवान बेटे की बीमारी के इलाज के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। ऐसी मां जो आंखों से देख नहीं पाती उसने फिर भी अपने बेटे की पीड़ा अपने मन की आंखों से देख ली। जब मां का क्लेजा अपने बेटे के दर्द को न देख पाया तो उसने अपने बेटे के लिए वो काम किया जो समाज की नजरों में मिसाल बन गया।
son with mother
जी हां, राजस्थान के सीकर जिले की रहने वाली इस महिला ने अपने अपने बेटे के इलाज में अपनी जमा पूंजी यहां तक की अपने सुहाग की आखिरी निशानी तक दाव पर लगा दी। लेकिन, अब बेटे की इलाज की व्यवस्था नहीं देख पाना उसी मां के लिए परेशानी का सबब बन गया है। इसके आगे की दास्तान बड़ी दर्दभरी है।
mother
दरअसल, हरिजन बस्ती में रहने वाले महज 30 साल के शंकर की दोनों किडनी फेल हो चुकी हैं, फिर भी बुढ़ापे में यह बुजुर्ग मां शांति बेटे के ठीक होने की आस लिए जी रही है और अपने खराब हालातों से जूझ रही है। शादीशुदा शंकर की दोनों किडनी खराब हो चुकी है। जिंदा रहने के लिए हर सात या 15 दिनों में डायलिसिस करानी पड़ती है जिसके बाद शंकर कुछ दिन आराम से निकाल पाता है।
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शंकर का डायलिसिस का इलाज बेहद महंगा पड़ रहा है। दोनों को सहारा देने के लिए बस्ती के लोग और परिजन भोजन आदि की व्यवस्था कर रहे हैं, क्योंकि शंकर का निजी अस्पताल में किडनी के लिए डायलिसिस कराना महंगा है और अब मां के पास इतने पैसे नहीं बचे कि वो उसका इलाज करा सके। वहीं सरकारी अस्पताल वाले ऐसे जवाब देते हैं कि सुनकर लगने लगता है जैसे किस्मत उनका मजाक उड़ा रही हो। जब भी मां-बेटे ने सरकारी अस्पतालों का रुख किया उन्हें पांच दिन के इंतजार के बाद इलाज का वक्त दे दिया गया।
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ऐसे में 65 साल की बूढ़ी मां शांति देवी पति की मौत के बाद से अपने बेटे की बीमारी में टूटती जा रही है। वो पहले ही बुढ़ापे के सहारे रहे अपने बड़े बेटे और एक बेटी को बीमारी में खो चुकी है। अब अगर शंकर को भी कुछ हो जाता है तो इस मां का ख्याल रखने वाला कोई नहीं रहेगा। इसलिए शांति ने शादी में मिले कंगन, चांदी की पाजेब सब बेच दी, ताकि उसका शंकर ठीक हो सके। अभी थोडे़ दिन पहले ही शंकर का एक मासूम लड़का करंट लगकर खत्म हो चुका है। बदनसीबी हाथ धोकर ऐसी पीछे पड़ी है कि मां को कुछ समझ ही नहीं आ रहा कि वह क्या करे।