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अफगानिस्तान की जंग में नपुंसक हो गया था सैनिक, 14 घंटे में एक 'चमत्कार' से लौटी मर्दानगी

Thu, 26 Apr 2018 08:28 AM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 26 Apr 2018 08:28 AM IST
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First ever penis transplant
man
अफगानिस्तान में जारी सैन्य संघर्ष के दौरान अपना प्राइवेट पार्ट गंवा चुके एक अमेरिकी सैनिक के भीतर डॉक्टरों ने पीनस (लिंग) और स्क्रोटम (अंडकोश) का प्रत्यारोपण करने में सफलता पाई है। दुनिया में अपने किस्म की यह पहली सफल सर्जरी करने में डॉक्टरों को 14 घंटे से भी अधिक समय लगा। इससे पहले के चार लिंग प्रत्यारोपण मौजूदा ऑपरेशन से अलग रहे हैं।


 
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यह चमत्कारिक सर्जरी अमेरिका के मैरीलैंड प्रांत स्थित बाल्टिमोर की जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में 11 डॉक्टरों की टीम ने की है। टीम में नौ प्लास्टिक सर्जन और दो यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर्स शामिल थे। सैनिक की पहचान उजागर नहीं की गई है लेकिन यूनिवर्सिटी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि जब सैनिक बेहोशी से बाहर आया तो उसे महसूस हुआ कि वह पहले से अधिक सामान्य हो गया है। इस सैनिक ने अफगानिस्तान में गलती से एक बम पर पैर रख दिया था और तभी हुए विस्फोट में वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया था। यह सर्जरी 26 मार्च को की गई।

 
First ever penis transplant
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इससे पहले के चार लिंग प्रत्यारोपण में सिर्फ शरीर के एक अंग का ही प्रत्यारोपण हुआ था जबकि यह ऐसा पहला ऑपरेशन है जिसमें डॉक्टरों ने अंडकोश समेत आसपास के एब्डोमिनल क्षेत्र और कोशिकाओं के पूरे सेक्शन का प्रत्यारोपण किया है। कई साल तक शोध और मृत लोगों पर किए प्रयोगों के बाद डॉक्टरों ने यह सफल सर्जरी की है। डॉक्टरों ने आशा जताई है कि यह सेवानिवृत्त सैनिक अब दोबारा अपनी सामान्य जिंदगी जी सकेगा। डॉक्टरों के मुताबिक अंगदान करने वाले शख्स के टेस्टिकल्स को सैनिक में प्रत्यारोपित नहीं किया गया है। इस सर्जरी के लिए लिंग, अंडकोश और एब्डोमिनल वॉल एक ऐसे दानदाता से ली गई जिसकी मौत हो चुकी है।

 
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johns hopkins university school of medicine
जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के प्लाल्टिक व रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी प्रमुख डॉ. डब्ल्यूपी एंड्रयू ली के मुताबिक मेडिकल भाषा में इस ऑपरेशन को वास्कुलराइज्ड कंपोजिट एलोट्रांसप्लांटेशन कहा जाता है। इसमें त्वचा, हड्डी, मांसपेशियां, रक्त वाहिकाएं और टेंडल सभी को बदला जाना जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि अब सर्जरी के बाद उसे जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी और वह छह से 12 माह में पूरी तरह सामान्य क्रियाकलाप कर सकेगा। डॉ. ली ने कहा कि युद्ध के कुछ जख्म ऐसे होते हैं जिनका कोई अंदाजा भी नहीं लगा पाता, जबकि अन्य मामलों में अंग काटने पड़ते हैं। इसलिए यह ऑपरेशन बेहद ही मुश्किल भरा और बारीक था, जो सफल रहा।

 
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