क्या आप जानते हैं कि देश में कश्मीर से अलग एक और जगह ऐसी है, जो स्वर्ग से भी कहीं ज्यादा सुंदर और अद्भुत है। यकीं नहीं आता तो खुद देख लीजिए।
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hemkund sahib
- फोटो : file photo
हम बात कर रहे हैं, सिखों की अटूट आस्था के प्रतीक श्री हेमकुंड साहिब की। उत्तराखंड के चमौली में स्थित श्री हेमकुंडसाहिब के कपाट 25 मई को खोल दिए जाएंगे। हेमकुंड साहिब प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा की मौजूदगी में हुई समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। 15200 फीट की ऊंचाई पर बने श्री हेमकुंडसाहिब गुरुद्वारा 6 महीने तक बर्फ से ढका रहता है।
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hemkund sahib
- फोटो : amar ujala bureau
श्री हेमकुंडसाहिब अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है और यह देश के सबसे महत्वपूर्ण गुरुद्वारों में से एक है। गुरूद्वारे के पास ही एक सरोवर है। इस पवित्र जगह को अमृत सरोवर अर्थात अमृत का तालाब कहा जाता है। यह सरोवर लगभग 400 गज लंबा और 200 गज चौड़ा है। यह चारों तरफ से हिमालय की सात चोटियों से घिरा हुआ है। इन चोटियों का रंग वायुमंडलीय स्थितियों के अनुसार अपने आप बदल जाता है।
कुछ समय वे बर्फ सी सफेद, कुछ समय सुनहरे रंग की, कभी लाल रंग की और कभी-कभी भूरे नीले रंग की दिखती हैं। इस पवित्र स्थल को रामायण के समय से मौजूद माना गया है। कहा जाता है कि लोकपाल वही जगह है जहां श्री लक्ष्मण जी अपना मनभावन स्थान होने के कारण ध्यान पर बैठ गए थे। कहा जाता है कि अपने पहले के अवतार में गोबिंद सिंह जी ध्यान के लिए यहां आए थे।
गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी आत्मकथा बिचित्र नाटक में इस जगह के बारे में अपने अनुभवों का उल्लेख किया है। श्री हेमकुंडसाहिब के बारे में कहा जाता है कि यह दो से अधिक सदियों तक गुमनामी में रही। गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी आत्मकथा बिचित्र नाटक में इस जगह के बारे में बताया, तब यह अस्तित्व में आई। सिख इतिहासकार-कवि भाई संतोख सिंह (1787-1843) ने इस जगह का विस्तृत वर्णन दुष्ट दमन की कहानी में अपनी कल्पना में किया था।