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देश में स्वर्ग से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत एक जगह, ये कश्मीर नहीं है...पर जन्नत से नजारे

Wed, 09 May 2018 10:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 09 May 2018 10:00 AM IST
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chandigarh, shri hemkund sahib gurudwara at chamoli, uttrakhand
hemkund sahib - फोटो : file photo
क्या आप जानते हैं कि देश में कश्मीर से अलग एक और जगह ऐसी है, जो स्वर्ग से भी कहीं ज्यादा सुंदर और अद्भुत है। यकीं नहीं आता तो खुद देख लीजिए।
chandigarh, shri hemkund sahib gurudwara at chamoli, uttrakhand
hemkund sahib - फोटो : file photo
हम बात कर रहे हैं, सिखों की अटूट आस्था के प्रतीक श्री हेमकुंड साहिब की। उत्तराखंड के चमौली में स्थित श्री हेमकुंडसाहिब के कपाट 25 मई को खोल दिए जाएंगे। हेमकुंड साहिब प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा की मौजूदगी में हुई समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। 15200 फीट की ऊंचाई पर बने श्री हेमकुंडसाहिब गुरुद्वारा 6 महीने तक बर्फ से ढका रहता है।
chandigarh, shri hemkund sahib gurudwara at chamoli, uttrakhand
hemkund sahib - फोटो : amar ujala bureau
श्री हेमकुंडसाहिब अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है और यह देश के सबसे महत्वपूर्ण गुरुद्वारों में से एक है। गुरूद्वारे के पास ही एक सरोवर है। इस पवित्र जगह को अमृत सरोवर अर्थात अमृत का तालाब कहा जाता है। यह सरोवर लगभग 400 गज लंबा और 200 गज चौड़ा है। यह चारों तरफ से हिमालय की सात चोटियों से घिरा हुआ है। इन चोटियों का रंग वायुमंडलीय स्थितियों के अनुसार अपने आप बदल जाता है।
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chandigarh, shri hemkund sahib gurudwara at chamoli, uttrakhand
hemkund sahib
कुछ समय वे बर्फ सी सफेद, कुछ समय सुनहरे रंग की, कभी लाल रंग की और कभी-कभी भूरे नीले रंग की दिखती हैं। इस पवित्र स्थल को रामायण के समय से मौजूद माना गया है। कहा जाता है कि लोकपाल वही जगह है जहां श्री लक्ष्मण जी अपना मनभावन स्थान होने के कारण ध्यान पर बैठ गए थे। कहा जाता है कि अपने पहले के अवतार में गोबिंद सिंह जी ध्यान के लिए यहां आए थे।
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chandigarh, shri hemkund sahib gurudwara at chamoli, uttrakhand
hemkund sahib
गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी आत्मकथा बिचित्र नाटक में इस जगह के बारे में अपने अनुभवों का उल्लेख किया है। श्री हेमकुंडसाहिब के बारे में कहा जाता है कि यह दो से अधिक सदियों तक गुमनामी में रही। गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी आत्मकथा बिचित्र नाटक में इस जगह के बारे में बताया, तब यह अस्तित्व में आई। सिख इतिहासकार-कवि भाई संतोख सिंह (1787-1843) ने इस जगह का विस्तृत वर्णन दुष्ट दमन की कहानी में अपनी कल्पना में किया था।
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