Weather: इस समय देश के कई इलाको में मौसम का बदला रूप देखने को मिल रहा है। जहां पहले सामान्य आंधी के साथ बारिश होती थी, वहीं अब तेज हवाएं, धूल भरी आंधियां, गरज-चमक के साथ तूफान और ओले भी पड़ रहे हैं। लेकिन लगातार अच्छी बारिश नहीं हो रही है। लोगों के मन में सवाल है कि ऐसा क्यों हो रहा है? आइए जानते हैं कि आखिर इसके पीछे की वजह क्या है?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम में होने वाले इस बदलाव के पीछे अल-नीनो, जलवायु परिवर्तन और वायुमंडलीय अस्थिरता जैसे कई वजहें काम कर रही हैं। उनका कहना है कि साल 2026 में तेजी से अल-नीनो की स्थिति बन रही है। प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी इलाके में जब पानी गर्म हो जाता है, तो अल नीनो बनता है। इसके कारण भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की हवाएं कमजोर हो जाती हैं।
हाल ही में भारतीय मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जारी किया था, जिसमें कहा था कि इस साल मॉनसून सामान्य से कम यानी 90 प्रतिशत के आसपास रह सकता है। इस बार 11 साल में सबसे कमजोर मानसून हो सकता है। अल नीनो की वजह से बारिश कम होती है। वायुमंडल में नमी और गर्मी के संयोजन से तेज आंधियां और स्थानीय तूफान बनते हैं। इसका असर यह होता है कि एक स्थान भारी बारिश होती है, तो वहीं दूसरी जगह पर सूखा पड़ता है। हवाएं तेज चलती हैं, क्योकि दबाव में अंतर अधिक हो जाता है।
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क्यों बारिश कम और आंधी-तूफान ज्यादा आ रहे हैं?
- फोटो : ANI
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी बारिश जो होताी है, थंडरस्टॉर्म के तौर पर होती है। इस मौसम सूखा रहता है और सुबह-शाम थंडस्टॉर्म आता है। केरल के रास्ते भारत में आज मानसून पहुंच गया है। हालांकि, दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर और मध्य भारत में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण यह मौसम बना है। अगर कोई मौसमी पैटर्न नहीं बनता है, तो तापमान फिर बढ़ेगा।
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क्यों बारिश कम और आंधी-तूफान ज्यादा आ रहे हैं?
- फोटो : संवाद
क्यों मौसम में बढ़ी अस्थिरता?
मई-जून के आसपास पूर्व-मॉनसून के समय में उत्तर भारत, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में धूल भरी आंधियां, गरज वाले तूफान और बारिश आम हो गई है। वैज्ञानिकों ने बताया है कि तेज गर्मी की वजह से जमीन बहुत गर्म हो जाती है। ठंडी हवाएं ऊपर आती हैं, तो अचानक तेज गति ऊपर उठती हैं। इससे गरज-चमक, 30 से 100 किमी वाली तेज हवाएं और धूल उड़ने लगती है।
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क्यों बारिश कम और आंधी-तूफान ज्यादा आ रहे हैं?
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भूमध्य सागर से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय हैं। यह उत्तर भारत में नमी लाते हैं, जिनकी वजह से हवा में अस्थिरता बढ़ जाती है, जिससे आंधी-तूफान आते हैं, लेकिन असमान बारिश होती है। कई बार एक ही दिन में तेज हवा के साथ बारिश होती है और फिर सूखा पड़ जाता है। इस पूरे पैटर्न को जलवायु परिवर्तन और बदतर बनाता जा रहा है। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से वायुमंडल में ज्यादा नमी रहती है, लेकिन बारिश के दिन कम हो रहे हैं।
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क्यों बारिश कम और आंधी-तूफान ज्यादा आ रहे हैं?
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वैज्ञानिकों का कहना है कि मध्यम बारिश वाले दिन कम होते जा रहे हैं, भारी बारिश की घटनाएं ज्यादा हो रही है। इसका मतलब है कि बारिश जब होती है तो वह बहुत भारी होती है, जिससे बाढ़ आ जाती है, लेकिन कुल मिलाकर मौसम सूखा रहता है। गर्म हवाएं अधिक ऊर्जा लेती हैं, जिससे तूफान और आंधियां ज्यादा शक्तिशाली होती हैं। इस साल बारिश कम होने और आंधी-तूफान अधिक आने की मुख्य वजह अल-नीनो, ग्लोबल वार्मिंग और वायुमंडलीय अस्थिरता का मिलना है। पहले की तरह मौसम अनुमानित नहीं रह गया है।