दुनिया में ऐसे कई शहर हैं जहां कभी लोग बसा करते थे पर अब कोई नहीं दिखेगा। इन भुताहा शहरों में जाने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए। इन्हीं में से एक है दक्षिण नामीबिया का शहर कोलमैंसकोप, जो लुडेरिट्स के बंदरगाह से कुछ ही दूर है। 1908 में कई लोग यहां इस उम्मीद से आए थे कि उन्हें यहां पर मौजूद हीरा बटोर कर अपनी किस्मत चमकाएंगे। दो साल में ही रेत के बीच ही लोगों ने स्कूल, कसीनो, अस्पताल बना लिए। लेकिन पहले विश्व युद्ध के बाद जैसे ही हीरे की बिक्री में गिरावट आई, यहां का पतन होना शुरू हो गया। 1950 में शहर खाली होने लगा और सिर्फ रेत ही रह गई।
इन शहरों में नहीं बसते इंसान
तायवान के उत्तरी इलाके में सैन जी नाम का गांव आलीशान पर्यटक स्थल के उद्देश्य से बनाया गया था जहां अमीर लोग आ सकें। लेकिन निर्माण के वक्त अनगिनत हदसों के कारण इसे रोक दिया गया। पैसे की कमी भी इसमें शामिल थी और ये हमेशा के लिए बंद हो गया। अब तो ये भी बातें होती हैं कि यह शहर बुताहा हो गया है और जो लोग यहां मरे थे, उनकी आत्मा भटकती है।
इन शहरों में नहीं बसते इंसान
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haunted cities
- फोटो : wikipedia
उत्तर यूक्रेन का शहर प्रिपयट में तो जैसे एलियन बसते हों। असल में यहां शेरनोबल परमाणु उर्जा प्लांट के कर्मचारी काम करते थे। लेकिन हादसे के बाद इसे 1986 में बंद कर दिया गया। हादसे से पहले यहां 50,000 लोग हुआ करते थे। अब कोई नहीं दिखता।
इन शहरों में नहीं बसते इंसान
इतली का शहर क्रैको मध्यकालीन दौर का है। ऊंचे ऊंचे पहाड़ों पर बनी इमारतें इसका सबूत हैं। 1891 में यहां 2000 लोग रहते थे। यहां कृषि को लेकर भी कई समस्याएं आईं। 1892 से 1922 के बीच 1300 उत्तर अमेरिका जा बसे। खराब कृषि के अलावा भूकंप और भूस्खलन जैसी आपदाओं और युद्ध ने स्थिति और बुरी कर दी। 1963 में बसे कुचे 1800 लोग भी पास वाले गांव में जा बसे।
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फ्रांस का छोटा सा शहर ओरेडॉर-सुर-ग्लांस की कहानी तो बहुत वीभत्स है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यहां जर्मन सैनिकों ने 642 निवासियों का कत्ल-ए-आम कर दिया था। असल में जर्मन सैनिकों को इसके पास वाले शहर पर कब्जा करना था लेकिन गलती से इस पर कर दिया। वहां से बच निकले एक व्यक्ति ने बताया था कि लोगों को पैरों में मारा गया ताकि वे धीरे धीरे मरें। जिन महिलाओं ने भागने की कोशिश की, उन्हें भी मार दिया गया।