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आखिर क्यों मनाया जाता है यूएफओ डे, कब देखा गया पहला यूएफओ?
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 02 Jul 2018 11:32 AM IST
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ufo
दुनिया में बहुत से लोग अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट जिन्हें उड़नतश्तरी या यूएफओ भी कहते हैं, के अस्तित्व में भरोसा रखते हैं। इनके लिए यह दिन सेलीब्रेट किया जाता है। इसलिए जुलाई में लोग छतों पर टेलिस्कोप लगाए आसमान निहारते दिख जाएं तो चौंकिएगा मत।
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सबसे पहले जर्मनी में देखी गई थी उड़नतश्तरी, 1561
जर्मनी के नूरेमबर्ग में सबसे पहले अप्रैल 1561 में लोगों ने आसमान में बड़े 'ग्लोब्स', विशालकाय 'क्रॉस' और अजीबोगरीब 'प्लेट' जैसी चीजें देखे जाने का दावा किया गया। उस समय के चित्रों और लकड़ी की कटिंग से उस घटना की जानकारी मिलती है।
जर्मनी के नूरेमबर्ग में सबसे पहले अप्रैल 1561 में लोगों ने आसमान में बड़े 'ग्लोब्स', विशालकाय 'क्रॉस' और अजीबोगरीब 'प्लेट' जैसी चीजें देखे जाने का दावा किया गया। उस समय के चित्रों और लकड़ी की कटिंग से उस घटना की जानकारी मिलती है।
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1897 में टेक्सस में यूएओ आया नजर
लोगों ने सिगार के आकार की कोई बड़ी चीज देखी जो कथिततौर पर विंडमिल से जा टकराई। टेक्सस हिस्टोरिकल कमिशन को एक संकेत मिला जिसमें इस बात का जिक्र था कि 1897 में यहां एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ जिसके मलबे से एक ऐलियन के शव को भी निकाला गया और किसी अनजान जगह पर उसे दफना दिया गया।
लोगों ने सिगार के आकार की कोई बड़ी चीज देखी जो कथिततौर पर विंडमिल से जा टकराई। टेक्सस हिस्टोरिकल कमिशन को एक संकेत मिला जिसमें इस बात का जिक्र था कि 1897 में यहां एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ जिसके मलबे से एक ऐलियन के शव को भी निकाला गया और किसी अनजान जगह पर उसे दफना दिया गया।
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अमेरिका में 1947 में देखे गए यूएफओ
एक शख्स को रॉसवैल में क्रैश हुए प्लेन जैसी चीज का मलबा मिला। कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें साफ लग रहा था कि यह स्पेसक्राफ्ट किसी दूसरी दुनिया से आया है। उन्होंने ऐलियन के शवों को भी देखने का दावा किया। हालांकि एयर फोर्स ने 1994 में अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि मलबा प्रयोग में लाए जा रहे सर्विलांस बैलूंस का था। जो ऐलियन के शव बताए जा रहे थे, वे वास्तव में डमीज थे। हालांकि कुछ लोग यह भी कहते हैं कि सरकार ऐलियन के धरती पर आने की इस घटना को छिपाना चाहती थी। इसलिए यह कहानी गढ़ दी गई।
उधर अमेरिका में ही 24 जून 1947 को एक प्राइवेट विमान के पायलट ने आसमान में उड़ती हुई किसी अज्ञात चीज को देखे जाने का दावा किया था। उनके साथ यह घटना Mount Rainier के करीब हुई थी। इस घटना की रिपोर्ट ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। इस घटना के दो सप्ताह के भीतर-भीतर ही ऐसी ही कई अज्ञात चीजें आसमान में उड़ते हुए देखे जाने के दावे किए गए। इसलिए यह घटना ओर भी बड़ी हो गई। द्वितिय विश्य युद्ध के बाद यूएफओ देखे जाने की इस घटना को आधुनिक युग की शुरुआत होने के साथ जोड़कर देखा जाने लगा।
एक शख्स को रॉसवैल में क्रैश हुए प्लेन जैसी चीज का मलबा मिला। कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें साफ लग रहा था कि यह स्पेसक्राफ्ट किसी दूसरी दुनिया से आया है। उन्होंने ऐलियन के शवों को भी देखने का दावा किया। हालांकि एयर फोर्स ने 1994 में अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि मलबा प्रयोग में लाए जा रहे सर्विलांस बैलूंस का था। जो ऐलियन के शव बताए जा रहे थे, वे वास्तव में डमीज थे। हालांकि कुछ लोग यह भी कहते हैं कि सरकार ऐलियन के धरती पर आने की इस घटना को छिपाना चाहती थी। इसलिए यह कहानी गढ़ दी गई।
उधर अमेरिका में ही 24 जून 1947 को एक प्राइवेट विमान के पायलट ने आसमान में उड़ती हुई किसी अज्ञात चीज को देखे जाने का दावा किया था। उनके साथ यह घटना Mount Rainier के करीब हुई थी। इस घटना की रिपोर्ट ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। इस घटना के दो सप्ताह के भीतर-भीतर ही ऐसी ही कई अज्ञात चीजें आसमान में उड़ते हुए देखे जाने के दावे किए गए। इसलिए यह घटना ओर भी बड़ी हो गई। द्वितिय विश्य युद्ध के बाद यूएफओ देखे जाने की इस घटना को आधुनिक युग की शुरुआत होने के साथ जोड़कर देखा जाने लगा।
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1951 में नई दिल्ली में देखा गया यूएफओ
नई दिल्ली में एक फ्लाइिंग क्लब के 25 सदस्यों ने सिगार के आकार की कोई चीज देखी, जो करीब 100 फुट लंबी थी। UFO अचानक कुछ देर बाद आंखों से ओझल हो गया। यह घटना वर्ष 1951 में 15 मार्च सुबह 10.20 बजे की बताई जाती है।
जुलाई 1952 में वॉशिंगटन डी. सी.
अमेरिका के वॉशिंगटन नैशनल एयरपोर्ट और एंड्रयू एयर फोर्स बेस के रेडार पर भी कई अजीबोगरीब चीजों के संकेत मिले। इस साल प्रॉजेक्ट ब्लू बुक लॉन्च किया गया जिससे आसमान में संभावित खतरे के बारे में जानकारी जुटाकर उसका विश्लेषण किया जा सके। हालांकि बाद में इस घटना को तापमान बढ़ने से जोड़ा गया। तर्क दिया गया कि गर्म हवा कभी-कभी ऐसी सीलिंग तैयार कर देती है जिससे रेडार प्रभावित हो जाते हैं। ऐसे में टेलिफोन के खंभे जैसी चीजें हवा में हजारों फुट ऊपर डिटेक्ट होने लगती हैं।
नई दिल्ली में एक फ्लाइिंग क्लब के 25 सदस्यों ने सिगार के आकार की कोई चीज देखी, जो करीब 100 फुट लंबी थी। UFO अचानक कुछ देर बाद आंखों से ओझल हो गया। यह घटना वर्ष 1951 में 15 मार्च सुबह 10.20 बजे की बताई जाती है।
जुलाई 1952 में वॉशिंगटन डी. सी.
अमेरिका के वॉशिंगटन नैशनल एयरपोर्ट और एंड्रयू एयर फोर्स बेस के रेडार पर भी कई अजीबोगरीब चीजों के संकेत मिले। इस साल प्रॉजेक्ट ब्लू बुक लॉन्च किया गया जिससे आसमान में संभावित खतरे के बारे में जानकारी जुटाकर उसका विश्लेषण किया जा सके। हालांकि बाद में इस घटना को तापमान बढ़ने से जोड़ा गया। तर्क दिया गया कि गर्म हवा कभी-कभी ऐसी सीलिंग तैयार कर देती है जिससे रेडार प्रभावित हो जाते हैं। ऐसे में टेलिफोन के खंभे जैसी चीजें हवा में हजारों फुट ऊपर डिटेक्ट होने लगती हैं।