अगर आप सिनेमाघरों में फिल्म देखने जाएं और पॉपकॉर्न न खाएं तो फिल्म अधूरी सी लगती है। आज पॉपकॉर्न दुनियाभर की पहचान बन गया है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि लगभग 4000 साल पहले पॉपकॉर्न को खाया नहीं बल्कि सजाया जाता था। इसके पीछे की कहानी बड़ी है रोचक है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि दुनिया में सबसे पहले अमेरिका के मूल निवासी पॉपकॉर्न खाया करते थे। हालांकि बाद में वहां रहने वाले यूरोपीय लोगों ने भी इसे खाना शुरू कर दिया था।
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दुनिया में पहली बार पॉपकॉर्न भूनने वाली मशीन 134 साल पहले यानी वर्ष 1885 में बनी थी। इस मशीन को अमेरिका के रहने वाले चार्ल्स क्रेटर ने बनाया था। हालांकि उस समय वो मूंगफली भूनने के लिए एक मशीन बना रहे थे, जो आगे चलकर पॉपकॉर्न भूनने वाली मशीन बन गई।
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बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इतिहासकार एंड्र्यू स्मिथ लिखते हैं कि चार्ल्स क्रेटर और उनके सहायक अपनी पॉपकॉर्न भूनने की मशीन को वर्ष 1893 के वर्ल्ड फेयर में लेकर गए थे। वहां वह दोनों आवाज लगाकर लोगों को पॉपकॉर्न चखने के लिए बुलाते थे और मशीन के साथ एक बैग मुफ्त में देने का वादा करते थे। आज चार्ल्स क्रेटर की कंपनी अमेरिका में पॉपकॉर्न भूनने वाली मशीन बनाने की सबसे बड़ी कंपनी है।
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कहा जाता है कि पॉपकॉर्न की खोज लगभग 4000 साल पहले न्यू मैक्सिको में हुई थी। तब यह चमगादड़ से भरी एक गुफा में मिला था, लेकिन उस वक्त किसी को यह मालूम नहीं था कि इसे खाया भी जाता है। तब इसे सजाने के काम में लाया जाता था। उस समय इससे सिर और गले के आभूषण बनाए जाते थे।