आज विज्ञान ने भले ही कितनी भी तरक्की कर ली हो, लेकिन दुनिया में ऐसे कई रहस्य आज भी हैं, जो अनसुलझे हैं, जिनके रहस्यों को आज तक वैज्ञानिक भी सुलझा नहीं पाए हैं। एक ऐसा ही रहस्य पूर्वी कैलिफोर्निया में स्थित एक रेगिस्तान में भी है, जिसे डेथ वैली (मौत की घाटी) के नाम से जाना जाता है।
2 of 7
डेथ वैली, खिसकने वाले पत्थर
- फोटो : Social media
कैलिफोर्निया के डेथ वैली की संरचना और तापमान भू-वैज्ञानिकों को हमेशा से चौंकाता रहा है, लेकिन इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली जो चीज है, वो है यहां के अपने आप खिसकने वाले पत्थर, जिन्हें सेलिंग स्टोन्स के नाम से जाना जाता है। यहां के रेस ट्रैक क्षेत्र में मौजूद 320 किलोग्राम तक के पत्थर भी अपने आप खिसक कर एक जगह से दूसरी जगह चले जाते हैं।
3 of 7
डेथ वैली, खिसकने वाले पत्थर
- फोटो : Social media
डेथ वैली में पत्थरों का खुद-ब-खुद खिसकना वैज्ञानिकों के लिए भी एक पहेली बनी हुई है। रेस ट्रैक प्लाया 2.5 मील उत्तर से दक्षिण और 1.25 मील पूरब से पश्चिम तक बिल्कुल सपाट है, लेकिन यहां बिखरे पत्थर अपने आप खिसकते रहते हैं। यहां ऐसे 150 से भी अधिक पत्थर हैं। हालांकि किसी ने भी अपनी आंखों से पत्थरों को खिसकते हुए नहीं देखा है।
4 of 7
डेथ वैली, खिसकने वाले पत्थर
- फोटो : Social media
सर्दियों में ये पत्थर करीब 250 मीटर से ज्यादा दूर तक खिसके मिलते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1972 में इस रहस्य को सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई गई थी। टीम ने पत्थरों के एक ग्रुप का नामकरण कर उस पर सात साल अध्ययन किया। केरीन नाम का लगभग 317 किलोग्राम का पत्थर अध्ययन के दौरान जरा भी नहीं हिला, लेकिन जब वैज्ञानिक कुछ साल बाद वहां वापस लौटे, तो उन्होंने उस पत्थर को एक किलोमीटर दूर पाया।
5 of 7
डेथ वैली, खिसकने वाले पत्थर
- फोटो : Social media
कुछ वैज्ञानिकों का यह मानना है कि तेज रफ्तार से चलने वाली हवाओं के कारण पत्थर एक जगह से दूसरी जगह चले जाते हैं। शोध बताते हैं कि रेगिस्तान में 90 मील प्रति घंटे की गति से चलने वाली हवाएं, रात को जमने वाली बर्फ और सतह के ऊपर गीली मिट्टी की पतली परत, ये सब मिलकर पत्थरों को गतिमान करते होंगे।