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Science News: मंगल ग्रह को लेकर नए खुलासे से डरे वैज्ञानिक, नए शोध में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी

Sun, 30 Jun 2024 12:52 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Sun, 30 Jun 2024 12:52 PM IST
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Mars under daily fire from space rocks, shows study on new class of quakes on Red Planet Scared Space Scientis
मंगल ग्रह को लेकर नए खुलासे से डरे वैज्ञानिक - फोटो : Freepik

Science News: वैज्ञानिक सालों से मंगल ग्रह के रहस्यों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। अब एक शोध में हैरान करने वाला खुलासा हुआ है, जिसने वैज्ञानिकों को हैरत में डाल दिया है। इस शोध के मुताबिक, हर वर्ष मंगल ग्रह से बास्केटबॉल के आकार की सैकड़ों अंतरिक्ष चट्टानें टकराती हैं। इसकी वजह से मंगल ग्रह की सतह पर बड़े-बड़े गड्ढे बनते हैं। नासा के इनसाइट मिशन (InSight) से मिले डेटा का इस्तेमाल वैज्ञानिक भविष्य के रोबोट मिशनों और अंतरिक्ष यात्रियों के दल को मंगल पर कहां उतारा जाए यह निर्धारित करने के लिए कर सकते हैं। 



अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इनसाइट मिशन को दिसंबर 2022 में समाप्त घोषित कर दिया गया था। नासा ने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि इस मिशन के लैंडर ने अपने सौर पैनलों पर मंगल ग्रह की धूल के जमाव को साफ नहीं कर पाया था। हालांकि, इस मिशन से इतने डेटा मिले हैं, जिन पर अभी भी शोध किया जा रहा है। 
 

Mars under daily fire from space rocks, shows study on new class of quakes on Red Planet Scared Space Scientis
मंगल ग्रह को लेकर नए खुलासे से डरे वैज्ञानिक - फोटो : Freepik

मंगल पर आते हैं भूकंप

इनसाइट मिशन के लैडर के साथ मंगल ग्रह पर पहला सीस्मोमीटर (भूकंप मापी यंत्र) भेजा गया था। यह संवेदनशील उपकरण ग्रह लैंडर के स्थान से हजारों मील दूर होने वाली भूकंपीय तरंगों का पता लगाने में सक्षम था। इनसाइट ने मंगल ग्रह पर अपने सीस्मोमीटर का इस्तेमाल कर 1,300 से अधिक भूकंपों का पता लगाया। यह उस समय होता है जब दबाव और गर्मी की वजह से मंगल ग्रह की सतह में दरार आ जाती है। हालांकि, इनसाइट ने मंगल ग्रह पर उल्कापिंडों के टकराने के साक्ष्य भी जुटाए हैं। 
 

Mars under daily fire from space rocks, shows study on new class of quakes on Red Planet Scared Space Scientis
मंगल ग्रह को लेकर नए खुलासे से डरे वैज्ञानिक - फोटो : Freepik

ग्रह पर क्यों गिर रही हैं अंतरिक्ष चट्टानें

मंगल ग्रह पर बड़े चट्टानी पिंडों से अलग हो गई उल्कापिंड अंतरिक्ष की चट्टानें गिरती हैं। नासा के मुताबिक, इन पिंडो का आकार धूल के कणों से लेकर छोटे क्षुद्रग्रहों के बराबर तक होता है। अंतरिक्ष में जब रहता है, तो उल्कापिंड कहा जाता है, लेकिन जब पृथ्वी या किसी दूसरे ग्रह के वायुमंडल से गुजरता है, तो उल्का कहलाता है।

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Mars under daily fire from space rocks, shows study on new class of quakes on Red Planet Scared Space Scientis
मंगल ग्रह को लेकर नए खुलासे से डरे वैज्ञानिक - फोटो : Freepik
वैज्ञानिकों का सवाल है कि आखिर मंगल ग्रह पर अधिक प्रभाव क्यों नहीं मिले हैं, क्योंकि यह ग्रह हमारे सौर मंडल के मुख्य क्षुद्रग्रह बेल्ट के पास स्थित है। जहां पर कई अंतरिक्ष चट्टानें मंगल ग्रह की सतह से टकराने के लिए निकलती हैं। मंगल ग्रह का वायुमंडल पृथ्वी की मोटाई का सिर्फ एक फीसदी है। इसका मतलब यह है कि ज्यादा उल्कापिंड बिना विघटित हुए इसके माध्यम से निकल जाते हैं।


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मंगल ग्रह को लेकर नए खुलासे से डरे वैज्ञानिक - फोटो : Freepik

मंगल ग्रह पर मिले नए गड्ढे

शोधकर्ताओं ने साल 2021 से इनसाइट के डेटा पर गहन अध्ययन किया है। इसमें पता चला है कि अंतरिक्ष की चट्टानें मंगल ग्रह से पहले से कहीं ज्यादा बार टकराती हैं। यह बीते अनुमानों से दो से 10 गुना अधिक है। साइंस एडवांसेज जर्नल में एक नया अध्यय प्रकाशित किया गया है, जिसमें यह बातें बताई गई हैं। ब्राउन यूनिवर्सिटी में पृथ्वी, पर्यावरण और ग्रह विज्ञान की एसोसिएट प्रोफेसर और अध्ययन की मुख्य लेखिका इंग्रिड डाबर ने बताया कि संभावना है कि मंगल ग्रह हमारे विचार से अधिक भूगर्भीय रूप से सक्रिय हो, जो ग्रह की सतह की उम्र और विकास के लिए निहितार्थ रखता है।

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