Martian Space Bricks: चांद और मंगल ग्रह पर कब तक इंसानी बस्तियां कब तक बसाई जाएंगी? यह अभी भी एक बड़ा सवाल है। अगर इंसान वहां पर बस जाते हैं, तो आखिर कैसे रहेंगे? इसको लेकर वैज्ञानिक सालों से रिसर्च कर रहे हैं। अब इस बीच इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) बेंगलुरु और इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने मिलकर अंतरिक्ष ईंट तैयार की है। इस ईंट की मदद से मंगल पर इमारतें बनाई जा सकती हैं। प्लॉस वन जर्नल में इसरो की यह रिसर्च प्रकाशित की गई है जिसमें इन अंतरिक्ष ईंटों को बनाने की विधि बताई गई है।
वैज्ञानिकों की तरफ से इस खास ईंट को बनाने के लिए मंगल की सिमुलेंट सॉयल (MSS) यानी प्रतिकृति मिट्टी और यूरिया का इस्तेमाल किया गया है। इन अंतरिक्ष ईंटों से मंगल ग्रह पर इमारत जैसी संरचनाएं तैयारी की जा सकती हैं। इससे मंगल ग्रह पर इंसानों को बसाने में मदद मिल सकती है।
2 of 6
मंगल ग्रह पर घर बनाने के लिए बनी ईंट
- फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया आधारित टेक्नोलॉजी मदद से अंतरिक्ष ईंटों को बनाया है। उन्होंने सबसे पहले मंगल की मिट्टी, स्पोरोसारसीना पेस्टुरी नाम के बैक्टीरिया, ग्वार गम, यूरिया और निकल क्लोराइड को एक साथ मिला लिया। इसके बाद इस घोल को ईंट के आकार के सांचों में डाल दिया। बैक्टीरिया ने कुछ दिनों बाद यूरिया को कैल्शियम कार्बोनेट के क्रिस्टल में बदल दिया।
3 of 6
मंगल ग्रह पर घर बनाने के लिए बनी ईंट
- फोटो : Pixabay
ISRO और IISc के वैज्ञानिकों ने साल 2020 के अगस्त में चांद की मिट्टी पर इस तरह का प्रयोग किया था। शोधकर्ताओं का कहना है कि चांद की ईंट बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रोसेस से सिर्फ बेलनाकार ईंटें ही बनाई जा सकती थीं। लेकिन अब वैज्ञानिकों के इस प्रयोग से कई तरह की ईंटें बनाई जा सकती हैं।
4 of 6
मंगल ग्रह पर घर बनाने के लिए बनी ईंट
- फोटो : Pixabay
IISc में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और इस रिसर्च में शोधकर्ता आलोक कुमार का कहना है कि मंगल ग्रह की मिट्टी से ईंट बनाना मुश्किल काम था। क्योंकि मंगल की मिट्टी में आयरन ऑक्साइड बहुत ज्यादा होता है। इसकी वजह से उसमें बैक्टीरिया पैदा नहीं हो पाता है। निकल क्लोराइड की मदद से मिट्टी को बैक्टीरिया के अनुकूल बनाया जाता है।
5 of 6
मंगल ग्रह पर घर बनाने के लिए बनी ईंट
- फोटो : Pixabay
बैक्टीरिया अपने प्रोटीन का इस्तेमाल कर कणों को एक साथ बांध देते हैं और संरध्रता को कम कर देते हैं। इससे मजबूत ईंटों को बनाने में मदद मिलती है।