{"_id":"607c1d23373b271636388785","slug":"interesting-story-of-most-vicious-thugs-of-india-who-sold-tajmahal-and-red-fort-by-fake-signature-of-president","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"कहानी भारत के सबसे शातिर ठग की: राष्ट्रपति का फर्जी हस्ताक्षर कर बेच दिया था ताजमहल और लाल किला","category":{"title":"Bizarre News","title_hn":"हटके खबर","slug":"bizarre-news"}}
कहानी भारत के सबसे शातिर ठग की: राष्ट्रपति का फर्जी हस्ताक्षर कर बेच दिया था ताजमहल और लाल किला
Thu, 06 May 2021 09:17 AM IST
संकल्प सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संकल्प सिंह
Updated Thu, 06 May 2021 09:17 AM IST
विज्ञापन
नटवरलाल
- फोटो : Social media
नटवरलाल का नाम कौन नहीं जानता? नटवरलाल ने अपने जीवन में इतनी चोरी और जालसाजी को अंजाम दिया कि आज इसका नाम ठगी और चोरी का प्रतीक बन चुका है। कई सारे लोगों के अंदर विभिन्न प्रतिभाएं होती हैं। कोई अच्छा गायक होता है तो कोई अच्छा खिलाड़ी। वहीं नटवरलाल एक शातिर चोर था। नटवरलाल का जन्म 1912 में हुआ था। ये बिहार के सिवान जिले का रहने वाला था।
नटवरलाल
- फोटो : Social media
नटवरलाल ने चोरी और जालसाजियों को अंजाम देने के लिए अपने कई सारे नाम रख रखे थे। उसका वास्तविक नाम मिथलेश कुमार श्रीवास्तव था। कई लोगों का कहना है कि नटवरलाल के 50 से भी अधिक नाम थे। इन्हीं नामों के सहारे वह कई सारी ठगी को अंजाम देता था।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social media
नटवरलाल ने चोरी की शुरुआत 1 हजार रुपये से की। वह हस्ताक्षर करने में माहिर था। नटवरलाल किसी भी व्यक्ति का हूबहू हस्ताक्षर कर सकता था। उसने यह 1 हजार रुपए पड़ोसी के नकली हस्ताक्षर करके उसके बैंक से निकाले थे। पढ़ाई लिखाई करने के बाद वह वकील बन गया। वकील का पेशा उसे पसंद नहीं आया। इसके बाद उसने जालसाजी और ठगी का रास्ता अपनाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
ताज महल
- फोटो : Social media
नटवरलाल ने कई लोगों से लाखों रुपयों की ठगी की। वह फरार होने में काफी माहिर इंसान था। पुलिस की पकड़ में आने के बाद भी वह फरार हो जाता। नटवरलाल काम चलाऊ अंग्रेजी बोल लेता था। नटवरलाल रंगबाज इंसान था। उसकी लपटी चपटी बातें किसी को भी अपनी गिरफ्त में ले सकती थी। कई बड़े व्यापारियों को उसने चूना लगाया। आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन यह बात सच है कि नटवरलाल ने कई मर्तबा ताज महल और लाल-किले को बेचा था। उसनेे इन्हें बाहर से आए विदेशियों को बेचा।
विज्ञापन
राष्ट्रपति भवन
- फोटो : Social media
उसकी ठगी की कोई सीमा नहीं थी। यहां तक की उसने भारत के राष्ट्रपति भवन को भी बेच दिया था। यह सब उसने राष्ट्रपति के फर्जी हस्ताक्षर करके किए थे। अपने शुरुआती दिनों में नटवरलाल ने वकील के साथ-साथ पटवारी की नौकरी भी की थी। नटवर का मन इन नौकरियों में नहीं लगा वह तो कुछ और ही उद्देश्य लिए हुए था। नटवरलाल अपने जीवन काल में कई बार पुलिस द्वारा पकड़ा गया और कई बार वह फरार भी हुआ।