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भारत का एकमात्र ऐसा पुल जिसका आज तक नहीं हुआ उद्घाटन, हैरान कर देगी इसकी वजह

Fri, 06 Dec 2019 04:55 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Fri, 06 Dec 2019 04:55 PM IST
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Howrah Bridge Indias only bridge that has not yet been inaugurated
हावड़ा ब्रिज - फोटो : Social media

दुनियाभर में ऐसे कई पुल हैं जो अपनी एक अलग पहचान रखते हैं। कहीं-कहीं ये पुल देश की शान भी कहलाते हैं। ऐसा ही एक पुल भारत में भी ही है, जो सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में प्रसिद्ध है। हैरानी की बात तो ये है कि इस विश्व प्रसिद्ध पुल का आज तक उद्घाटन भी नहीं हुआ है। 



Howrah Bridge Indias only bridge that has not yet been inaugurated
हावड़ा ब्रिज - फोटो : Social media

यह पुल है कोलकाता का हावड़ा ब्रिज। यह हमेशा से कोलकाता ही पहचान रहा है। इस पुल को बने 76 साल हो चुके हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दिसंबर 1942 में जापान का एक बम इस ब्रिज से कुछ दूरी पर ही गिरा था, लेकिन यह ब्रिज तब भी ज्यों का त्यों ही खड़ा रहा, जैसे आज है। 

Howrah Bridge Indias only bridge that has not yet been inaugurated
पुराना हावड़ा ब्रिज - फोटो : Social media

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्नीसवीं सदी के आखिरी दशकों में ब्रिटिश इंडिया सरकार ने कोलकाता और हावड़ा के बीच बहने वाली हुगली नदी पर एक तैरते हुए पुल के निर्माण की योजना बनाई। ऐसा इसलिए क्योंकि उस दौर में हुगली में रोजाना कई जहाज आते-जाते थे। खंभों वाला पुल बनाने से कहीं जहाजों की आवाजाही में रुकावट न आये, इसलिए 1871 में हावड़ा ब्रिज एक्ट पास किया गया। 

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Howrah Bridge Indias only bridge that has not yet been inaugurated
हावड़ा ब्रिज - फोटो : Social media

साल 1936 में हावड़ा ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू हुआ और 1942 में यह पूरा हो गया। उसके बाद 3 फरवरी, 1943 को इसे जनता के लिए खोल दिया गया। उस समय यह पुल दुनिया में अपनी तरह का तीसरा सबसे लंबा ब्रिज था।  

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Howrah Bridge Indias only bridge that has not yet been inaugurated
हावड़ा ब्रिज - फोटो : Social media

साल 1965 में कविगुरु रबींद्र नाथ के नाम पर इसका नाम रवींद्र सेतु रखा गया। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ब्रिज को बनाने में 26,500 टन स्टील का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें 23,500 टन स्टील की सप्लाई टाटा स्टील ने की थी। 

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