Day-Night in Space: भारत ने चंद्रमा पर चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक लैंडिंग कराकर इतिहास रच दिया। भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश बन गया है। इसके साथ ही चंद्रमा पर कदम रखने वाला अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बन गया है। अब चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत गगनयान-3 की तैयारी में जुटा है। अंतरिक्ष में इंसान को भेजने की भारत तैयारी कर रहा है। इसके लिए भारत के वैज्ञानिक अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा में ट्रेनिंग ले रहे हैं।
Space: अंतरिक्ष में कितनी बार होता है सूर्योदय और सूर्यास्त, एस्ट्रोनॉट्स को कैसे लगता है रात-दिन का पता
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धरती से बाहर जाते ही एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष में पहुंचे जाते हैं। अब सवाल यह खड़ा होता है कि उन्हें दिन रात का पता कैसे चलता है? अंतरिक्ष में घूम रहे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर मौजूद अंतरिक्षयात्रियों के लिए दिन और रात कैसे होती है? इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन एक अनुसंधान सुविधा है, जिसका माइक्रोग्रैविटी एक्सपेरिमेंट्स के लिए इस्तेमाल होता है।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा, रूस की रॉस्कॉस्मॉस, यूरोप की ईएसए, जापान की जेएक्सए और कनाडा की अंतरिक्ष एजेंसी सीएसए की मदद से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की शुरुआत नवंबर 2000 से हुई थी। इसमें अलग-अलग देशों के अंतरिक्षयात्री रहते हैं जो दूसरे ग्रहों के ऊपर अध्ययन करते हैं। 400 किमी की औसत ऊंचाई पर अंतरिक्ष स्टेशन एक अंडाकार पथ पर धरती की परिक्रमा करता है।
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24 घंटे में कितनी बार होता है सूर्योदय और सूर्यास्त?
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर किसी भी वक्त औसतन 5 से 7 अंतरिक्ष यात्री रहते हैं। क्या यहां पर अंतरिक्ष यात्री दिन और रात का अनुभव करते हैं? आईएसएस 27,600 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगाता है। 90 मिनट में यह धरती का एक चक्कर पूरा कर लेता है। स्पेस स्टेशन करीब आधा समय सूर्य के प्रकाश और बाकी समय पृथ्वी की छाया में रहता है। स्पेस स्टेशन ऐसे हर चक्कर में लगभग 45 मिनट रात के अंधरे और 45 मिनट दिन के उजाले में रहता है। 24 घंटे में स्पेस स्टेशन 16 बार धरती की परिक्रमा करता है। धरती के एक दिन में स्पेस स्टेशन पर मौजूद अंतरिक्ष यात्री 16 सूर्योदय और 16 सूर्यास्त देखते हैं।
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आईएसएस पर कैसे बनता दिन-रात का माहौल?
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पृथ्वी के दिन और रात जैसा माहौल तैयार करने के लिए आईएसएस को यूनिवर्सल को-ऑर्डिनेटेड टाइम यानी यूटीसी पर सेट किया गया है। यूटीसी समय का वैश्विक मानक है, जिसका निर्धारण दो फैक्टर्स का इस्तेमाल कर किया जाता है। पहला इंटरनेशन एटॉमिक टाइम, जिसमें बहुत ही ज्यादा सटीक परमाणु घड़ियों की मदद से गण्ना की जाती है, तो वहीं दूसरा, यूनिवर्सल टाइम जिसमें धरती के घूर्णन के आधार पर समय की गणना होती है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन कई देशों का संयुक्त प्रोजेक्ट है। इसमें दुनिया की पांच प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियां शामिल हैं। ऐसे में सबसे अच्छा विकल्प यूटीसी था। यह सभी एजेंसियों के बीच प्रभावी मदद की सुविधा उपलब्ध कराता है।