वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से मचे कोहराम को रोकने के फिलहाल टीकाकरण ही बेहतर तरीका दिख रहा है। भारत समेत कई देशों ने कोरोना वायरस का टीका विकसित कर लिए हैं। हालांकि, टीकों का बंटवारा समान रूप से नहीं हो रहा है। दुनिया के कई देशों में टीकाकरण के साथ मास्क लगाने पर भी ढिलाई दी जा चुकी है, वहीं कई देश ऐसे भी हैं जहां अब तक वैक्सिनेशन शुरू ही नहीं हुआ है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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चाड में नहीं शुरू हुआ टीकाकरण
अफ्रीकी देश चाड दुनिया के गरीब देशों में से एक है। इस देश का एक तिहाई हिस्सा सहारा रेगिस्तान में आता है। आपको बता दें कि इस देश में अबतक कोरोना वायरस की वैक्सीन नहीं पहुंच पाई है। इतना ही नहीं यहां डॉक्टर और अस्पताल के बाकी स्टाफ भी बिना टीका लगवाए मरीजों का इलाज करने के लिए मजबूर हैं।
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हैती में भी नहीं पहुंच सकी वैक्सीन
हैती का भी हाल बिल्कुल चाड की तरह है। 11 मिलियन की आबादी वाले इस देश में अब तक वैक्सीन की एक भी खुराक नहीं पहुंच सकी है। हैती देश पहले से भी लगातार प्राकृतिक आपदाओं का शिकार होता रहा है, वहीं कोरोना की मार ने इसे और हलाकान कर रखा है।
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कोरोना वैक्सीन
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कोवैक्स प्रोग्राम के तहत इस देश को एस्ट्राजेनेका ने करीब सात लाख खुराक देने का वादा किया था, लेकिन इस देश ने खुद हाथ जोड़ लिए थे। क्योंकि इस देश के पास वैक्सीन स्टोर करने की व्यवस्था ही नहीं है। इस वजह से यहां से सिंगल डोज की मांग आई ताकि इस मुश्किल को कुछ हद तक कम किया जा सके।
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क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ
विकसित देशों में इस बात पर बहस चल रही है की कौन सी वैक्सीन सबसे बढ़िया है, लेकिन आर्थिक तौर पर कमजोर देशों के पास कोई विकल्प ही नहीं है। अप्रैल के अंत में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉ. टेड्रोस अधानोम गेब्रेसस ने वैक्सीन को लेकर अपनी चिंता जताते हुए बताया कि अमीर देशों के पास लगभग 82 फीसदी वैक्सीन है, वहीं गरीब देशों के पास कुल मिलाकर केवल 0.3 फीसदी ही खुराक है।