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बिल्ली पालने वाले हो जाएं सावधान, वैज्ञानिकों ने किया इस खतरे का आगाह

Tue, 02 Feb 2021 10:59 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Tue, 02 Feb 2021 10:59 PM IST
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Cat owners should be careful scientists warn due to parasite
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

हम में से ऐसे कई लोग होंगे, जो शौकिया तौर पर घरों में बिल्लियां पालते हैं। बिल्लियां इंसान को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचाती हैं। लेकिन हाल ही में हुए एक शोध ने बिल्लियों को लेकर एक अलग तरह का खुलासा किया है। इस शोध के मुताबिक बिल्लियों से फैलने वाला एक परजीवी इंसानों में कई खतरनाक बीमारियों का कारण का बन रहा है। ऐसे में वैज्ञानिकों ने बिल्ली पालने वाले लोगों को विशेष रूप से सावधानी बरतने को कहा है।



Cat owners should be careful scientists warn due to parasite
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

परजीवी का दिमागी बीमारी से ताल्लुक
बता दें कि काफी समय पहले से ही वैज्ञानिक 'टी गोंडी' नामक एक परजीवी को लेकर भ्रमित थे। इस परजीवी को लेकर वो इस बात को ठीक से नहीं समझ पा रहे थे कि इसकी स्कीजोफ्रेनिया सहित मानसिक बुखार में क्या भूमिका है? पिछले कई अध्ययनों में यह पता नहीं चल पाया है कि इस परजीवी का बीमारी से कोई संबंध है। लेकिन इस अध्ययन ने कुछ अलग ही बातों पर प्रकाश डाला है।

Cat owners should be careful scientists warn due to parasite
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

बिल्लियों से ऐसे फैलता है संक्रमण
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका में 40 फीसदी बिल्लियां संक्रमित हैं। अगर बिल्लियों से फैलने वाले ये परजीवी लीवर या नर्वस सिस्टम तक पहुंच गया तो वे पीलिया और अंधेपन जैसी बीमारी भी विकसित कर सकते हैं। बता दें कि संक्रमण के पहले कुछ सप्ताह में बिल्लियां अपने आसपास मलत्याग द्वारा लाखों परजीवी के अंडे रोज पैदा करने लगती हैं। ऐसे में कुछ लोगों को तो घरेलू बिल्लियों से सीधे टोक्सोप्लास्मोसिस संक्रमण आ जाता है। वहीं कुछ लोगों में यह बिल्लियों या उनके मल के पानी और मिट्टी में मिलने से होता है, जहां ये परजीवी एक साल तक जिंदा रह सकते हैं।

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Cat owners should be careful scientists warn due to parasite
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

मानसिक स्वास्थ्य से संबंध
वैज्ञानिकों को लगता है कि टी गोंडी दिमाग में गांठ बनाकर उसकी काम करने में बदलाव ला देते हैं। इससे जोखिम लेने वाली प्रवृत्ति बढ़ाने वाले तत्व जोपामाइन का स्तर भी बढ़ने लगता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

दिमाग में सिस्ट
बता दें कि टी गोंडी इंसानी न्यूरोन में भी गांठें बनाता है, जो बढ़ने के बाद साइकोसिस, दिमागी जलन और डिमेंटिया जैसे खतरनाक स्थितियां तक पैदा कर सकता है। यहां तक कि यह ऑटिज्म और अल्जाइमर बीमारी का कारण भी बन सकता है।

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