Science News: वैज्ञानिक अक्सर नई-नई खोज करते हैं। कभी-कभी उनकी खोज बेहद महत्वपूर्ण होती है। एक बार फिर वैज्ञानिकों ने बेहद अहम खोज की है। उन्होंने एक भूवैज्ञानिक स्थल की खोज की है। उनका कहना है कि यह स्थल एंथ्रोपोसीन नाम के प्रस्तावित नए युग को दिखाता है। धरती के इतिहास की आधिकारिक समयरेखा को बदलने की दिशा में यह खोज बेहद महत्वपूर्ण है। पहली बार साल 2002 में एंथ्रोपोसीन शब्द का इस्तेमाल किया गया था। नोबेल पुरस्कार विजेता रसायन वैज्ञानिक पॉल क्रुटजेन और जीव विज्ञानी के प्रोफेसर यूजीन स्टोएमर ने एंथ्रोपोसीन युग शब्द का पहली बार इस्तेमाल किया था।
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कॉलिन वाटर्स ने अपने बयान में आगे कहा है कि हम एक ऐसी स्थिति में पहुंच चुके हैं, जिसे एक नए भूवैज्ञानिक युग की तरह परिभाषित करने की जरूरत है। एंथ्रोपोसीन वर्किंग ग्रुप कुल 35 वैज्ञानिकों का एक समूह है। ग्रुप में शामिल सभी वैज्ञानिक 2009 से एंथ्रोपोसीन को धरती की आधिकारिक टाइमलाइन में शामिल करने के लिए काम कर रहे हैं।
कब हुई एंथ्रोपोसीन युग की शुरुआत
35 वैज्ञानिकों के ग्रुप ने 2016 में बताया था कि 1950 से 1954 के बीच एंथ्रोपोसीन युग की शुरुआत हुई थी। इस समय परमाणु हथियार परीक्षणों की शुरुआत हुई थी। इससे दुनिया भर में प्लूटोनियम के भू-रासायनिक निशान मिल सकते हैं।
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तब से शोधकर्ताओं की तरफ से 12 स्थलों पर विचार किया गया है। इन स्थलों से उनके प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए आवश्यक और महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकते हैं। इनमें से नौ पर मतदान हुआ है। वैज्ञानिकों की तरफ से कनाडा के ओंटारियो की क्रॉफर्ड झील को एंथ्रोपोसीन के भूवैज्ञानिक प्रभाव को पकड़ने वाला सबसे अच्छा स्थान माना गया है। लेकिन हर कोई एंथ्रोपोसीन को एक भूवैज्ञानिक वास्तविकता या एक नया युग की घोषणा करने पर सहमत नहीं है।
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धरती के इतिहास को कई युगों में बांटा जा सकता है
धरती के 4.5 अरब साल के इतिहास पर भूगर्भिक टाइमलाइन हमारी समझ के लिए आधिकारिक रूपरेखा दे सकता है। धरती के इतिहास को भूवैज्ञानिक कई तरह के युगों में बांटते हैं। इनके अंदर भी कई युगों को बांटा गया है। उदाहरण के तौर पर वर्तमान में हम मेघालयन युग में रह रहे हैं। यह होलोसीन युग का हिस्सा है। इस युग की शुरुआत 11,700 साल पहले आखिरी हिमयुग के खत्म होने के बाद हुई थी। भूवैज्ञानिक अध्यायों का नाम अक्सर उन स्थानों के नाम पर होता है, जहां पर इसका अध्ययन होता है। जैसे फ्रांस के जुरा पर्वत में जीवाश्म से भरी चट्टानों के नाम पर जुरासिक काल का नाम रखा गया।